पत्रकार उत्पीडऩ बर्दाश्त नहीं  रवीन्द्र दिवाकर
बुन्देलखंड मीडिया पत्रकार क्लब ने एडीएम को सौंपा ज्ञापन
अन्तिम पारौल पर दर्ज मुकदमा निरस्त करने की माँग की

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ललितपुर। जनपद में आजकल पत्रकार मुसीबत में हैं। अक्सर विपक्षी साजिश कर पत्रकारों पर एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज करा दे रहे हैं। हाल ही में 13 नवंबर को थाना कोतवाली सदर में एक दबंग के बहकावे में आकर राजाराम अहिरवार नामक व्यक्ति ने पत्रकार अंतिम जैन पारौल के खिलाफ एक झूठा मुकदमा गाली गलौच कर धमकाने का एससीएसटी एक्ट के तहत दर्ज कराया है। इसके पहले भी पत्रकारों पर ऐसे ही झूठे मुकदमे दर्ज कराये जा चुके हैं। बुन्देलखंड मीडिया पत्रकार क्लब ने जिलाधिकारी को सम्बोधित एक ज्ञापन अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे राजेश श्रीवास्तव को सौंपकर इन मुकदमों पर अपना आक्रोश व्यक्त किया और बताया कि एससीएसटी एक्ट का दुरुपयोग रोका जाये। माँग की कि अन्तिम पारौल के मामले में तत्काल निष्पक्ष जाँच कर पत्रकार को राहत पहुँचाई जाये। पत्रकारों ने यह भी बताया कि पत्रकारों का काम निष्पक्ष खबर का प्रकाशन-प्रसारण होता है। इसमें उसके कई विरोधी पैदा हो जाते हैं। ऐसे में जब भी किसी पत्रकार के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो उसकी सम्यक जाँच उपरान्त निष्पक्ष कार्यवाही होना चाहिये। झूठी रिपोर्ट लिखी जाकर पत्रकार का उत्पीडऩ नहीं होना चाहिये। अपर जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि प्रार्थनापत्र पर समुचित कार्यवाही होगी। इस दौरान बुन्देलखंड मीडिया पत्रकार क्लब के संरक्षक रवीन्द्र दिवाकर, जाकिर राज चौहान, राजाराम यादव, फहीम बख्श, अध्यक्ष अभिषेक बाजपेयी, महामंत्री परशुराम झा, उपाध्यक्ष मनमोहन चौबे, वेदप्रकाश लिटौरिया, शहनाज सिंह के अलावा सहयोगी अमित लखेरा, शैलेश गौतम, राममूर्ति तिवारी, केतन, महेश वर्मा, पंकज रैकवार, अमित रजक, अमित राठौर, सुनील कुमार जैन, अनूप नाँगल, महेश यादव, इंद्रजीत गौतम आदि मौजूद रहे।
फोटो-पी2
कैप्सन-डीएम को सम्बोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपते पत्रकार
अनुज सिंह ठाकुर ब्यूरो रिपोर्ट ललितपुर

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।