बीना में राजनीति की भेंट चढ़ा गणतंत्र दिवस समारोह
विधायक का नाम छपे आमंत्रण जनपद पंचायत कार्यक्रम से हटाए गए : राष्ट्रगान के अपमान के आरोप पर विधायक का पलटवार

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बीना (राजेश जैन)। वैसे तो राजनीति का यह स्वरूप बन चुका है कि यहां धर्म के नाम पर, समाज के नाम पर, सैनिकों के नाम पर, जातियों के नाम पर, राजनीति होती रही है किंतु अब शहीदों, देश और राष्ट्रीय पर्वों के नाम पर भी राजनीति होने लगी है। 75 वां गणतंत्र दिवस समारोह बीना में भाजपा और कांग्रेस की राजनीति की भेंट चढ़ गया। जहां प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी बीना तहसील का मुख्य आयोजन शासकीय उत्कृष्टता विद्यालय में संपन्न कराया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने देश भक्ति से ओत-प्रोत सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। किंतु इन सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की चर्चा न होकर शहर में गणतंत्र दिवस समारोह में की गई राजनीति की चर्चा हो रही है।
कांग्रेस की जीत पचा नहीं पा रही भाजपा – निर्मला सप्रे
दरअसल में मुख्य गणतंत्र दिवस आयोजन में जहां मुख्य अतिथि जनपद अध्यक्ष ऊषा राय कार्यक्रम अध्यक्ष विधायक निर्मला सप्रे एवं विशेष अतिथि नपाध्यक्ष लता सकवार को बनाया गया था। कार्यक्रम में मात्र 2 मिनट की देरी होने के कारण विधायक निर्मला सप्रे और नगरपालिका अध्यक्ष लता सकवार की अनुपस्थिति में जनपद अध्यक्ष से ध्वजारोहण करा दिया गया। उस समय विधायक निर्मला सप्रे स्कूल के मुख्य द्वार से प्राचार्य सीएम मंसूरी, पीटीआई अशोक अहिरवार एवं स्काउट के बैंड के साथ प्रवेश कर चुकी थीं। मात्र 2 मिनट में वे ध्वजारोहण स्थल तक पहुंच सकती थी किंतु इसके पूर्व ही बीना एसडीएम देवेन्द्र प्रताप ङ्क्षसह द्वारा जनपद पंचायत के एक पदाधिकारी के माध्यम से जनपद अध्यक्ष ऊषा राय को ध्वज की डोरी पकड़ा कर झंडा फहरवा दिया गया। नियमानुसार पीटीआई पूरे सम्मान के साथ अतिथियों को ध्वज की डोरी पकड़ाता है उसके बाद ही ध्वजारोहण होता है किंतु भाजपा नेताओं को बीना में कांग्रेस विधायक की जीत रास नहीं आ रही है।
प्राचार्य मंसूरी आए विधायक के पक्ष में सामने –
उल्लेखनीय है कि भाजपा द्वारा इसी गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर बीना विधायक निर्मला सप्रे पर राष्ट्रगान के अपमान को लेकर तरह-तरह के आरोप सोशल मीडिया के माध्यम से लगाए जा रहे हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि जब राष्ट्रगान चल रहा था उसी दौरान विधायक निर्मला सप्रे, प्राचार्य सीएम मंसूरी एवं अन्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों और बैंड के साथ कार्यक्रम के दौरान चलकर आ रही थीं। भाजपा का आरोप है कि उन्हें अपने सम्मान की चिंता थी जबकि इस संदर्भ में विधायक निर्मला सप्रे और प्राचार्य सीएम मंसूरी ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है।
जिसकी पार्टी का ध्वज तिरंगा हो वह राष्ट्रगान का अपमान कैसे कर सकती हैं –
विधायक का कहना है कि जो वीडियो वायरल किया जा रहा है वह भाजपा के ही लोगों द्वारा बनाया गया है जबकि वास्तविक वीडियो में राष्ट्रगान की आवाज सुनाई नहीं दे रही है। विधायक का कहना है कि स्काउट के बैंड और ढोल की आवाज में यह पता ही नहीं चल रहा था कि विद्यालय में ध्वजारोहण हो चुका है और राष्ट्रगान चल रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस का ध्वज ही तिरंगा है उस तिरंगा और राष्ट्रगान का अपमान मैं कैसे कर सकती हँू। विधायक ने आरोप लगाया कि अपमान तो भाजपा नेताओं ने किया है जो राष्ट्रगान के समय मेरी वीडियोग्राफी कर रहे थे। उनका कहना है कि क्या विधायक और जनप्रतिनिधि के लिए 2 मिनट रुका नहीं जा सकता था। उन्होंने बीना एसडीएम देवेन्द्र प्रताप सिंह पर भी मनमानी के आरोप लगाए हैं, उनका कहना है कि एसडीएम अगर चाहते तो ऐसा नहीं होता। किंतु वह हाथ बांधे खड़े रहे।
जनपद पंचायत में विधायक के नाम वाले आमंत्रण कर दिए गए गायब –
इसी तरह जनपद पंचायत में परंपरानुसार विधायक और जनपद अध्यक्ष ध्वजारोहण करते हैं और उसी परंपरा के अनुसार जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा आमंत्रण पत्र भी छपवाए गए और उनमें विधायक निर्मला सप्रे का नाम भी छापा गया। किंतु बीना जनपद पंचायत में भाजपा की राजनीति करने वाले कुछ लोगों ने संबंधित प्रेस से कार्ड उठाकर रद्दी की टोकरी में डाल दिए या उन्हें गायब कर दिया और उसकी जगह कम्प्यूटर से बनाए गए आमंत्रण पत्र भेजे गए जिसमें विधायक निर्मला सप्रे का नाम नहीं था।
जनपद के कर्मचारी को धमका रही भाजपा –
विधायक निर्मला सप्रे का यह भी आरोप है कि उक्त कार्ड जिनमें उनका नाम था उसे वायरल करने वाले व्यक्ति को भी भाजपा नेताओं द्वारा धमकाया जा रहा है। विधायक निर्मला सप्रे ने आरोप लगाया है कि कम से कम राष्ट्रीय पर्व को तो राजनीति से ऊपर उठकर भाजपा के नेता देख लेते। किंतु उन्हें अब राष्ट्रीय पर्वों में भी राजनीति दिखाई दे रही है। जो अनुचित है और अमान्य है।

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