दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने पुलिस की पहलदुर्घटना संभावित क्षेत्र में लगाए गए चेतावनी साइन बोर्ड

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देवास से विष्णु शिंदे

देवास पीपलरावा पुलिस अधीक्षक देवास के स्पष्ट निर्देशानुसार जिले में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में गत दिवस थाना प्रभारी सुबोध गौतम के नेतृत्व में सूरजना फाटा को दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित करते हुए वहां चेतावनी साइन बोर्ड लगाए गए।
बताया गया कि उक्त स्थान पर पूर्व में तीन लोगों की दर्दनाक मृत्यु हो चुकी है, जिसे देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया। लगाए गए साइन बोर्ड में वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे अपने वाहनों को धीमी गति से चलाएं, यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचें।
थाना प्रभारी सुबोध गौतम ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण तेज रफ्तार और लापरवाही है। ऐसे में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां चेतावनी बोर्ड लगाना बेहद जरूरी है, ताकि वाहन चालक समय रहते सतर्क हो सकें और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस अवसर पर थाना प्रभारी सुबोध गोतम,आरक्षक देवेंद्र, एएसआई मांगीलाल परमार, प्रधान आरक्षक एवं अन्य आरक्षक उपस्थित रहे। पुलिस प्रशासन द्वारा की गई इस पहल की क्षेत्रवासियों ने सराहना करते हुए इसे जनहित में एक सराहनीय कदम बताया।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं भी यातायात नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।