बीना नगरपालिका की बैठक हंगामेदार रही। सीएमओ राहुल कौरव ने पार्षदों से आग्रह किया कि टैक्स बढ़ाने के बाद जो रिपोर्ट जाती है उसके आधार पर 5 करोड़ की ग्रांट विकास के लिए आती है, इसलिए टैक्स बढ़ाना अनिवार्य है अन्यथा यह ग्रांट नहीं आ पाएगी। इस पर सभी पार्षदों ने इंकार करते हुए कहा कि हम क्षेत्र की जनता को 15-15 दिन तक पानी नहीं देते हैं, 3-3 माह तक सफाई नहीं होती है, ऐसे में हम उन पर जलकर और सफाईकर का भार बढ़ा दें तो हमारा वार्डों में जाना मुश्किल हो जाएगा। जनहित को देखते हुए अन्य ऐसे करा रोपण जो कॉलोनाईजरों, व्यवसायिक भवनों के लिए जरूरी थे उन्हें बढ़ाया गया है।
नेता प्रतिपक्ष प्रशांत राय ने नपा अध्यक्ष को सुनाई खरी खरी
शुक्रवार को नगरपालिका की बैठक शुरू होने के पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रशांत राय ने नपाध्यक्ष लता सकवार द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति एक्ट के तहत उन पर कराई एफआईआर को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने नपाध्यक्ष को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि उनके द्वारा हमेशा महिलाओं का सम्मान किया जाता है और किया जाता रहेगा। इसके बाद भी अपने ही वार्ड की समस्याओं को लेकर आने पर कुछ विरोधियों द्वारा नपाध्यक्ष को भडक़ाने पर उनके विरुद्ध झूठी रिपोर्ट कराई गई, जिसका फैसला ईश्वर और न्यायालय दोनों करेंगे। उन्होंने कहा कि जनहित में बात करने पर यदि इस तरह एफआईआर कराई जाती रही तो एक दिन सभी पार्षदों पर एफआईआर दर्ज हो जाएगी।
प्रस्ताव आधे अधूरे प्रस्तावों को किया पार्षदों ने खारिज
अन्य प्रस्ताव के अनुसार बीना के सुप्रसिद्ध प्राचीन मारुति मंदिर परिसर में पार्किंग बनाने का सभी पार्षदों द्वारा विरोध किया गया। इस विषय में भी टुडे एम.पी. एक्सप्रेस ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताते हुए लिखा था कि इस परिसर में विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहते हैं इसलिए यहां पार्किंग नहीं बनना चाहिए। इन्हीं विचारों से प्रेरित होकर सभी पार्षदों ने एक स्वर में मारुति मंदिर परिसर में पार्किंग के प्रस्ताव पर असहमति व्यक्त कर दी। पार्षद बीडी रजक ने बीपीसीएल की सीएसआर से बीना के विकास में सहयोग करने का मामला उठाया जिस पर सीएमओ ने बताया कि वे कई बार पत्र भेज चुके हैं इस पर सभी पार्षदों ने एक स्वर में कहा कि बीपीसीएल के वाहनों को बीना शहर में नहीं चलने दिया जाएगा, बीपीसीएल के लोगों को भी शहर में कोई जगह नही ंदी जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में एक बार फिर नगरपालिका पार्षदों के साथ मिलकर चर्चा करने पर जोर दिया गया। विभिन्न प्रकार के कर बढ़ाए जाने को लेकर सभी पार्षदों ने असहमति जताई, इसलिए आम जनता पर बोझ बनने वाले जलकर, सफाई कर में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की जा सकी। इस प्रस्ताव में कुछ करों में ही वृद्धि हुई जिससे आम जनता पर बोझ नहीं आता है। कुल मिलाकर नगरपालिका परिषद की बैठक हंगामेदार तो रही ही, इसके अलावा भ्रष्टाचार की पोलें भी खूब खोली गईं। बैठक में जहां महिला पार्षद शांत रहीं वहीं भारती राय ने नगरपालिका की नीतियों पर कई प्रकार के प्रश्न खड़े किए।


