विशेष नशामुक्ति सप्ताह विधिक साक्षरता एव जागरूकता शिविर का आयोजन

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गढ़ाकोटा – आज गढ़ाकोटा के सिविल अस्पताल में विशेष नशामुक्ति शिविर राष्ट्रीय विधिक प्राधिकरण नशा पीड़ितों को विधिक सेवाएं एव नशा उन्मूलन के लिए विधिक सेवाएं और योजनाओं को तहसील विधिक सेवा समिति व्यवहार न्यायालय गढ़ाकोटा के अध्यक्ष मजिस्ट्रेट अम्बर श्रीवास्तव ने शिविर आये लोगो को स्वस्थ के बारे में बताया उसके बाद में डॉ सुयश सिंघई के द्वारा डायलेशस मशीन और गर्भवती महिलाओँ की उपचार नि:शुल्क सेवाओं के बारे में बताया तद्पश्चात अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एड. जमील कुरैशी ने सभी को नशे को छोड़ने को कहा , डॉ सिंघई के द्वारा नशामुक्ति केंद्र के बारे में बताते हुए कहा की हमारे जिला सागर में खोले गए है, जिसमे नशे को पूरी तरह नशा छुड़ाने के लिए दवाओं के लिए लोगो भेजा जाता या फिर व्यक्ति को किसी नशे की लत से परेशान हो तो उसे नशामुक्ति केंद्र में भर्ती करा सकते है, इस अवसर पर तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष मजिस्ट्रेट अम्बर श्रीवास्तव स्वास्थ विभाग के सभी कर्मचारी और डॉ शिवम् रजक, अधिवक्ताओ में राजाराम कोरी, राजा कुरैशी, शंभु राय एवं समस्त गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे ।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।