2013 में तात्कालीन विधायक डॉ. विनोद पंथी एवं सांसद भूपेन्द्र सिंह ने शुरू कराया था ऐरण महोत्सव

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मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद एसडीएम सहित प्रशासन ने लिया जायजा
बुंदेलखंड की प्राचीन ऐतिहासिक नगरी ऐरन में तीन दिवसीय महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। लगभग सवा साल पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीना दौरे के दौरान इस महोत्सव के आयोजन की घोषणा की थी, जिसके बाद अब संस्कृति विभाग इसे मूर्त रूप देने में जुटा है। शनिवार दोपहर संस्कृति विभाग के जॉइंट डायरेक्टर रितेश सिंह, एसडीएम विजय डेहरिया और नायब तहसीलदार हेमराज मेहर ऐरन पहुंचे। अधिकारियों ने प्रस्तावित महोत्सव स्थल और ऐरन के ऐतिहासिक परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं पर चर्चा की।
बीना (टीएमई न्यूज)। ऐरन प्राचीन भारत की अमूल्य धरोहरों में शामिल है। यहां भीम गजा, भगवान वराह की विशाल प्रतिमा और शैव एवं वैष्णव परंपरा से जुड़ी अनेक दुर्लभ मूर्तियां मौजूद हैं। ये प्रतिमाएं गुप्तकालीन कला शैली का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती हैं, जो इस स्थल के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को दर्शाती हैं।
ऐरन का उल्लेख गुप्तकालीन इतिहास में प्रमुख रूप से मिलता है। यहां से प्राप्त शिलालेख तत्कालीन शासन व्यवस्था, धर्म और संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं। यही कारण है कि ऐरन को मध्यप्रदेश के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में गिना जाता है, जो गुप्तकालीन वैभव का साक्षी है।
जल्द ही होगी तारीख की घोषणा
एसडीएम विजय डेहरिया ने बताया कि महोत्सव की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन इसे ऐरन के ऐतिहासिक स्वरूप के अनुरूप भव्य बनाने पर विचार किया जा रहा है। महोत्सव के मद्देनजर सडक़ निर्माण, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और पर्यटकों की सुविधाओं से जुड़े कार्य तेज कर दिए गए हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा भी ऐतिहासिक प्रतिमाओं और स्थल के संरक्षण को लेकर व्यवस्थाएं सुदृढ़ की जा रही हैं। इस तीन दिवसीय महोत्सव के माध्यम से ऐरन की ऐतिहासिक विरासत, प्राचीन प्रतिमाओं और सांस्कृतिक धरोहर को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
2013 में ऐरण महोत्सव में हुए थे बुंदेलखण्डी आयोजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
हाल ही में अगस्त 2025 में संस्कृति विभाग द्वारा ऐरण महोत्सव को शासकीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया गया है। बता दें कि यह पहला अवसर नहीं है जब ऐरण महोत्सव शासकीय स्तर पर मनाया जाएगा इसके पूर्व वर्ष 2013 में तात्कालीन विधायक डॉ. विनोद पंथी के प्रयासों से शासकीय स्तर पर विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से ऐरण महोत्सव मनाया गया था। पूर्व विधायक डॉ. विनोद पंथी ने बताया कि जब मैं विधायक थी और सागर संसदीय क्षेत्र के सांसद भूपेन्द्र सिंह ठाकुर थे तब सांसद जी के माध्यम से हम दोनों के संयुक्त प्रयास से मप्र शासन ने ऐरण महोत्सव मनाने का निर्णय लिया था। उन्होंने बताया कि उस समय तात्कालीन मंत्री राघव जी भाई भी इस आयोजन में शामिल हुए थे। आयोजन को भव्य रूप देते हुए स्थानीय एवं प्रसिद्ध बुंदेली कलाकारों के सांस्कृतिक प्रदर्शन इस आयोजन में हुए थे, इसके बाद मेरे विधायक नहीं रहने के बाद यह आयोजन बंद कर दिया गया।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।