भाई-बहिनों के मिलन में ट्रेनें बन रही बाधक जनरल डिब्बों की कमी से ट्रेनों में नहीं जगह

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बीना (टीएमई न्यूज)। रक्षाबंधन के चलते स्टेशन पर दिल्ली, मुंबई, कोटा की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रा करने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में करीब एक माह से वेटिंग चल रही थी। कुछ लोग तत्काल में रिजर्वेशन कराकर यात्रा कर रहे हैं, लेकिन जिनके रिजर्वेशन नहीं हो पा रहे हैं उन्हें जनरल कोच में खड़े होकर यात्रा करनी पड़ी। जिससे लोगों को खासी परेशानी हो रही है। दरअसल रक्षाबंधन के समय ट्रेनों में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा है। त्यौहारों के बाद ही वेटिंग लिस्ट खत्म हो सकती है। कई यात्रियों को तो ट्रेनों में पैर रखने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति लंबी दूरी की ट्रेनों के जनरल कोच में है।

जिसमें यात्री खड़े होकर यात्रा कर रहे हैं, कुछ यात्रियों ने तो दो सीटों के बीच झूला बांधकर उस पर बैठकर यात्रा की। ट्रेनों के शौचालयों तक में यात्री बैठे नजर आए। तत्काल के लिए लग रही भीड़ वेटिंग ज्यादा होने के कारण लोग तत्काल टिकट बुक कराने के लिए सुबह से लंबी कतारें काउंटर पर लगने लगती हैं। लोग ऑनलाइन ज्यादा रुपए खर्च करके तत्काल टिकट बुक कर रहें हैं ताकि किसी न किसी तरह से घर पहुंच सकें। त्यौहार के चलते ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए आरपीएफ, जीआरपी ने चैकिंग शुरू कर दी है। क्योंकि ट्रेनों में भीड़ के चलते असामाजिक तत्वों से घटनाएं घटित करने की संभावनाएं बढ़ जाती है। रेलवे ने अभी तक केवल एक ही स्पेशल ट्रेन रानीकमलापति-रीवा- रानीकमलापति के बीच चलाने की घोषणा की है। जबकि मंडल से अलग-अलग रुट पर कम से कम एक-एक स्पेशल ट्रेन चलाई जा सकती थी। जिसके बाद यात्रियों को काफी हद तक यात्रा करने में सुविधा होती।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।