चिरनिद्रा मे लीन 103 वर्षीय श्रीमति रामरानी चौरसिया करन्जुआ पुल मुक्ति धाम  मे हुआ अंतिम संस्कार लोगो ने दी भावभीनी श्रृध्दाजंलि

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  गौरझामर,-नगर के प्रतिष्ठित नागरिक सामाजिक कार्यकर्त्ता कमलेश चौरसिया खैरीवालो की माता जी एवं रमन अमन चौरसिया की दादी पूर्व आर आई स्व  श्री बैनीप्रसाद जी चौरसिया की धर्मपत्नी श्रीमति रामरानी चौरसिया का 103 वर्ष की दीर्घायु मे शनिवार 23 नवम्वर की सुबह करीब चार बजे दुखद निधन हो गया उनके अवसान की खबर जैसे ही लोगो को लगी नगर मे शोक की लहर छा गई अपरान्ह अंतिम यात्रा में बडी संख्या मे लोगो ने भाग लेकर दिवंगत आत्मा को भाव पूर्ण श्रृध्दाजंलि अर्पित की, स्वर्गीय श्री मति रामरानी चौरसिया अपने पीछे पांच यशस्वी पुत्रो दो पुत्रियो तथा नातीपोतो प्रपोतो प्रपोतियो का भरापूरा परिवार छोड गई है

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।