देवरी कला।बीना प्राथमिक शाला में  मंगलवार को  लगातार मेनू के अनुसार मध्याह्न भोजन मिले खीर-पूरी सब्जी तो खिले बच्चों के चेहरे

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देवरी कला ।जब मीडिया की टीम देवरी तहसील के बीना प्राथमिक शाला पहुंची तो वहां पर मध्यान्ह भोजन देखा तो मेनू अनुसार बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन परोसा जा रहा था जिसमें खीर पुरी और आलू छोले टमाटर की सब्जी गुणवत्तापूर्ण पाई गई

सागर जिले के देवरी तहसील के प्राथमिक शाला बीना में मंगलवार को विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन में खीर पूरी एवं सब्जी परोसी गई।
मध्याह्न भोजन में खीर पूरी  सब्जी पाकर बच्चे खुश नजर आए। देवरी तहसील के अधिकांश विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन के नाम पर केवल दाल रोटी या सब्जी रोटी  गुणवत्ताहीन भोजन परोस दिया करते हैं और समूह संचालकों द्वारा अध्यनरत बच्चों के मुंह का निवाला छीन अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं ।
दिन मंगलवार को जब मीडिया टीम देवरी तहसील के बीना प्राथमिक शाला पहुंची तो वहां पर मध्यान्ह भोजन देखा तो मेनू अनुसार बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन परोसा जा रहा था जिसमें खीर पुरी और आलू छोले टमाटर की सब्जी गुणवत्तापूर्ण पाई गई ।
बीना प्राथमिक शाला में बच्चों की कुल दर्ज संख्या 128 है, जिसमें 80 से ऊपर बच्चे उपस्थित पाए गए।
मध्यान भोजन के विषय में जब अध्यनरत बच्चों से  बात की तो बताया कि  हमारे स्कूल में ऐसा ही अच्छा मध्याह्न भोजन परोसा जाता है जो मेनू में रहता है वही दिया जाता है और स्वाद में भी अच्छा लगता है । जब वहां के शाला प्रभारी गोपाल सिंह गौंड़ से पूछा तो उन्होंने बताया कि मैं जब से इस विद्यालय में पढ़ा रहा हूं तब से हरदौल स्वसहायता समूह द्वारा बच्चों के लिए मध्यान भोजन मेनू के अनुसार दिया जा रहा है मध्याह्न भोजन में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।
और जब हरदौल स्वसहायता समूह की अध्यक्ष प्रकाश रानी गौंड़ से मध्यान्ह भोजन के बारे में बात की तो बताया कि हम लोग जो मेनू में रहता है वही मध्यान्ह भोजन बच्चों के लिए खिलाते हैं ,जितने भी इस विद्यालय में बच्चे हैं अपने घर जैसे हैं । मध्यान्ह भोजन में हम कोई समझौता नहीं करते जो शासन द्वारा गाइड लाइन है हम उन्हीं का पालन करते हैं। और अन्य विद्यालयों में भी इसी प्रकार बच्चों के लिए  समूहों द्वारा मध्यान्ह भोजन दिया जाना चाहिए।सागर से देवभूषण दुबे की रिपोर्ट

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।