घायल हुए साथ पड़ने वाले छात्रों की मदद करने पर स्कूल प्रबंधन ने टी.सी. वापिस लेने का सुनाया फरमान ।

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गढ़ाकोटा – एक और देश का सर्वोच्च न्यायालय कहता है कि अगर रास्ते में कोई व्यक्ति घायल हो जाता है तो उसकी मदद कर प्राथमिक उपचार के लिए हॉस्पिटल में एडमिट करा सकता हैं इस विषय में पुलिस या अन्य लोगों द्वारा किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जा सकता । छात्रों द्वारा दी गई जानकारी अनुसार बीते दिनों नगर के प्राइवेट स्कूल हाली फेथ हायर सेकेंडरी कॉन्वेंट स्कूल गढ़ाकोटा के दो छात्र जो स्कूल जा रहे थे रास्ते में स्कूल के पास ही बड़े ट्रक से सड़क दुर्घटना हो गई जिस पर मामला दर्ज भी हो गया है, जहां दुर्घटना हुई उसी के पीछे स्कूल की बस सहित अन्य वाहन आ रहे थे जिसमें घायल छात्रों के दोस्त भी थे,उनके द्वारा स्कूल का स्टॉप भी था तब घायलों हॉस्पिटल ले जाने के बोला तो स्टॉप द्वारा बोला गया कि जब तक बड़े सर नहीं आ जाते उन्हें कोई नहीं उठाएगा , तभी स्कूली दोस्त बस से नीचे उतरकर घायलों को 2 स्कूटी पर बिठा कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गढ़ाकोटा लाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की गंभीर हालत देख सागर रिफर कर दिया, उपरांत स्कूल प्रबंधन भी हॉस्पिटल पहुंचा ,छात्रों ने बताया कि स्कूल के प्रिंसिपल कलाम खान द्वारा कहा गया कि इन्हें कौन हॉस्पिटल ले कर आया तो छात्रों द्वारा बताया गया कि स्थिति को देखते हुए स्कूटी पर बिठा है हॉस्पिटल लाए है जिसके बाद सर द्वारा डायरी में नाम लिख लिया और बोला गया कि तुम लोग स्कूल से अपनी टीसी प्राप्त कर लेना , हालांकि स्कूल प्रबंधन द्वारा छात्रों को टीसी नहीं दी गई है विचारणीय बात यह है कि स्कूल प्रबंधन का दायित्व बनता था कि किसी का इंतजार न करते हुए घायल हुए अपने ही स्कूल के छात्रों को प्रथमिक उपचार हेतु हॉस्पिटल पहुंचाए न की ये चिंता करना की बस या गाड़ी बच्चो के खून से गंदी हो जाएगी ।
इस विषय को लेकर अभिभावक सहित विद्यार्थियों के आक्रोश है एवं यह चिंता का विषय है कि आखिर क्या कारण होता है कि बच्चे अपनी ही बाइक से स्कूल के लिए जाते बहुत सारे सवाल स्कूल प्रबंधन कर खड़े हो रहे हैं।
आखिर प्रबंधन इतना निर्दय कैसे हो सकता है कि जिस छात्रों की फीस से स्कूल सहित समस्त प्रकार की व्यवस्थाएं चल रही उन्हीं की जान से खिलवाड़ किया जा रहा हैं।
स्कूल संचालक द्वारा बताया गया कि जो बच्चे घायल हुए थे उन्हें में खुद परिजनों के साथ मिलकर सागर लेकर गया था, ओर समय समय पर प्रबंधन द्वारा स्कूली छात्रों के लिए हेलमेट एवं लाइसेंस के लिए जागरूक करता आया हूं, हालांकि टीसी वापिस लेने के सम्बंध में बात की तो स्कूल संचालक द्वारा जवाब नहीं दिया गया ,बोला गया मिसगाइड किया जा रहा हैं ।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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