जनभागीदारी से  सुनार नदी की साफ सफाई ,नमामि गंगे अभियान के तहत हुई शुरूआत

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गौरझामर। यहां की सबसे बडी व जीवन दायिनी सुनार नदी को स्वच्छ साफ व गंदगी मुक्त बनाने के लिये जागरुक व पर्यावरण प्रेमियो ने आगे आकर सफाई अभियान का श्री गणेश किया है इस सिलसिले मे जनपद पंचायत केसली की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती प्रतिष्ठा जैन ने बताया कि नमामि गंगे अभियान के तहत जनपद पंचायत केसली की ग्राम पंचायत खैरीकला से उद्गमित सुनार नदी विकासखण्ड केसली की ही ग्राम पंचायत जनकपुर से प्रवाहित होते हुये लगभग 250 किलो मीटर के प्रवाह क्षेत्र को पोषित करते हुए पन्ना जिले में केन नदी में विलय को प्राप्त होती है। सुनार नदी के प्रवाह क्षेत्र में बसी विकासखण्ड की 16 ग्राम पंचायतों द्वारा अभियान के प्रारंभिक दिवस में जनसहयोग एवं जनभागीदारी द्वारा नदी की साफ सफाई, घाट की सफाई, नदी की पूजा अर्चना, आरती एवं मिट्टी के कटाव को रोकने हेतु पोधारोपण हेतु गड्ढों की खुदाई के कार्य की शुरूआत की गई।
इसके साथ ही नदी पर जनभागीदारी से ग्रामीणों व्दारा नदी पर बोरी बंधान कर जल को रोका एवं सहायक सचिव भरत लोधी द्वारा बताया गया की मनरेगा योजना से जल संरक्षण के प्रगतिरत कार्यों में कपिल धारा कूप गेबियन स्ट्रक्चर  स्टैपडेम शोकफिट को प्राथमिकता से इस अभियान में 16 जून तक पूर्ण कराएंगे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।