तेंदूखेड़ा ।पुलिस की तत्परता से एक व्यक्ति की बची जान

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तेंदूखेड़ा – पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश  कैलाश मकवाना के निर्देशानुसार एवं पुलिस अधीक्षक, श्रीमति मृगाखी डेका के कुशल नेतृत्व में प्रतिदिन निकाला जा रहा फ्लेग मार्च, पुलिस की तत्परता से एक व्यक्ति की बची जान, नदी में कूदे व्यक्ति को सकुशल बचाया गया।*
पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश कैलाश मकवाना के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक श्रीमति मृगाखी डेका के कुशल नेतृत्व में जिले में अपराधों पर लगाम लगाने, कानून व्यवस्था बनाए रखने एवं आमजनों में सुरक्षा का अहसास कराने साथ ही पुलिस की बिजीविल्टी को बढाने के उद्देश्य से जिले के संपूर्ण थाना/चौकी क्षेत्रों में प्रतिदिन नियमानुसार सांयकालीन गणना के उपरान्त फ्लेग मार्च निकाला जा है जिले के सभी थानों में प्रतिदिन सांयकालीन गणना के उपरान्त क्षेत्र में फ्लेग मार्च निकालकर पुलिस टीमों द्वारा क्षेत्र का भ्रमण किया जा रहा है। इसी क्रम में विगत दिवस थाना पलोहा टीम क्षेत्र के भ्रमण पर थी इसी दौरान सूचना प्राप्त हुई कि ककरा घाट पुल से एक व्यक्ति द्वारा आपनी जान देने के उद्देश्य से पानी में छलांग लगा दी सूचना प्राप्त होते ही पुलिस टीम द्वारा तत्काल मौके पर पहुचकर गोताखोरों की मदद से अथक परिश्रम के बाद उसे सकुशल पानी से बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की गयी।  इनकी रही सराहनीय भूमिका ककरा घाट पुलिस से पानी में कूदे व्यक्ति की जान बचाने में थाना प्रभारी,पलोहा उनि अनिल भगत,आरक्षकप्रताप, आरक्षक गौरीशंकर एवं गोताखोर दीपक मिश्रा, दुर्गेश नोरिया, अर्जुन नोरिया, करण नोरिया, एवं चोखेलाल की सराहनीय भूमिका रही है। पुलिस अधीक्षक, श्रीमति मृगाखी डेका द्वारा सभी को पुरूस्कृत करने की घोषणा की गयी है।संवाददाता- अमित खरे तेंदूखेड़ा

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।