दमोह/राज्यमंत्री श्री लोधी ने 200 करोड़ रू के विकास कार्य स्वीकृत होने पर किया केंद्र सरकार का आभार व्यक्त

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दमोंह/प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि भारत सरकार ने मध्यप्रदेश में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए लगभग 200 करोड रुपए स्वीकृत किए हैं, हमने कुछ दिनों पूर्व प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने के संबंध में कुछ प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे थे, जिनमें से भारत सरकार ने लगभग 200 करोड रुपए के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
राज्यमंत्री श्री लोधी ने बताया भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर का विस्तार एवं राम राजा सरकार की नगरी ओरछा में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए यह राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी को धन्यवाद देते हुए कहा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में लगातार पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, आने वाले समय में मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य होगा ऐसा हमारा प्रयास है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।