देवरी कला।मध्यान भोजन में मेनू का नहीं हो रहा पालन, अध्ययनरत बच्चों के लिए दिन मंगलवार को एक-एक पूरी हो रही मध्यान भोजन में वितरण

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देवरी कला।अधिकारियों की उदासीनता के चलते और समूह संचालक की  मनमर्जी अनुसार सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन में जमकर धांधली हो रही है। बच्चों को मेन्यू अनुसार भोजन नहीं मिलता। वहीं समूहों द्वारा घटिया भोजन परोसा जाता है। इस बेहद गंभीर मामले में अधिकारियों और प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। इस लापरवाही के चलते समूह  संचालक गरीब बच्चों के पेट का निवाला छीन रहे हैं। सागर जिले की देवरी जनपद के ग्राम पंचायत सुना रहली गांव देवरी खेड़ा शास प्राथमिक शाला में मध्यान्ह भोजन में जमकर लापरवाही हो रही है। यहां के समूह द्वारा बच्चों को मेन्यू अनुसार मध्याह्न भोजन नहीं दिया जाता है ।

जानकारी के मुताबिक शासकीय प्राथमिक शाला देवरी खेड़ा में   पहली कक्षा से लेकर पांचवी कक्षा तक 14  बच्चे अध्ययनरत हैं।
जिसमें शाला प्रभारी भोले शंकर ठाकुर ,शिक्षिका देवकी विश्वकर्मा  विद्यालय में पदस्थ हैं । जन जागृति स्व सहायता समूह के संचालक सीतारानी द्वारा मेन्यू चार्ट के हिसाब से यहां भोजन नहीं बनाया जा रहा है।
आपको बता दें कि दिन मंगलवार को मध्यान भोजन में खीर, पूरी और आलू टमाटर की सब्जी बच्चों को वितरण होनी चाहिए ।
लेकिन समूह संचालक द्वारा अध्यनरत बच्चों के लिए
मध्यान भोजन में केवल टमाटर की सब्जी और एक  पूरी और खीर जिसमें शक्कर और दूध की मात्रा भी नाम मात्र की एवं उसमें किशमिश चिरौंजी आदि किराना कुछ भी नहीं डाला गया था।
आपको बता दें कि 1 अप्रैल को प्रवेश उत्सव के दौरान हर एक विद्यालय में मध्यान भोजन वितरण के विषय में खास तौर पर निर्देशित किए गए थे कि बच्चों के लिए गुणवत्ता युक्त एवं मेनू अनुसार मध्यान  भोजन वितरण किया जाना चाहिए लेकिन समूह संचालक एवं शिक्षकों की मनमर्जी के चलते अध्यनरत बच्चों के लिए मध्यान भोजन वितरण नहीं किया गया
कुछ ग्रामीणों ने समूह पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यहां समूह लम्बे समय से काम कर रहा है जो अपनी मनमर्जी से काम करता है।
स्कूल में इन हालातों को देखते हुए शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के ऊपर भी सवाल उठ रहे हैं।

शिक्षा के मंदिर में बदहाल सिस्टम
सरकारी स्कूलों में अभिभावकों द्वारा अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए शिक्षा के मंदिर में भेजा जाता है। जहां पर बच्चों को शिक्षक शिक्षा देते हैं और वहां पर अध्ययन करने वाले बच्चों को शासन द्वारा संचालित मिड डे मील योजना के तहत दोपहर के समय भोजन उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था की गई है। जहां पर एक तो सरकारी स्कूलों के हालत यह है कि वहां पर एक तो मेन्यू के अनुसार बच्चों को भोजन उपलब्ध नहीं होता है। बच्चों की शैक्षणिक व्यवस्थाओं के प्रति किसी का ध्यान नहीं है।
इनका कहना

हर एक बच्चों के लिए चार-चार पुरी मिलना चाहिए लेकिन बच्चों की उपस्थिति बढ़ गई जिस कारण से बच्चों के लिए एक-एक पूरी दी गई और मैंने समूह वालों से बोल भी दिया था फिर भी नहीं दिया ।

शाला प्रभारी भोले शंकर ठाकुर

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।