देवरी । जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत अनंतपुरा से भ्रष्टाचार की चलती ट्रेन जिम्मेदार सचिव एवं रोजगार सचिव सरपंच जनपद पंचायत इंजिनियर एवं अफसरों की सवारी

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देवरी । 5 लाख 45000 हजार की लागत से अनंतपुरा ग्राम पंचायत में बनाई जा रही नाले पर विजय स्तंभ से  विजय जैन के घर तक बाउंड्री बाल चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट

बाउंड्री बाल में जमीन से मजबूती लाने की जगह जमीन में गाड़ी जा रही है सरिया की राड

पत्रकारों के बताने के बाद देवरी जनपद सीईओ ने लिया संज्ञान में कहा यह तो गलत हो रहा है  अनंतपुरा में बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य जांच कराकर सचिव रोजगार सचिव और इंजीनियर को दिए जाएंगे नोटिस

देवरी कला।  देवरी ब्लॉक में ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार रोकने का नाम नहीं ले रहा है हम बात कर रहे हैं देवरी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अनंतपुरा में मनरेगा से बनने वाली 5 लाख 45000 हजार की बाउंड्री वॉल की जहां एस्टीमेट का हवाला देकर ग्राम पंचायत के सचिव भरत उपाध्याय ,सरपंच एवं रोजगार सचिव द्वारा लाखों रुपए की बाउंड्री वॉल जो की अनंतपुर ग्राम विजय स्तंभ के पास बने नाले में वर्तमान में बाउंड्री वालों का निर्माण कार्य चल रहा है बाउंड्री वॉल में ना ही तो जमीन से नींव भरकर निर्माण कार्य किया जा रहा है बल्कि जमीन  डायनामेंट मशीन से  गढ्ढा खुदवा कर सरिया को गड़ाया जा रहा है और धूल भरी डस्त का उपयोग कर लाखों रुपए की बाउंड्री बाल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती हुई नजर आ रही है जबकि नाले में बनने वाली 5 लाख 45000 हजार  की बाउंड्री बाल बरसात के एक ही पानी में बह जाएगी क्योंकि ग्राम पंचायत से भ्रष्टाचार की चलती ट्रेन में जिम्मेदार अफसर की सवारी नजर आ रही है अब इसे क्या कहा जाए क्योंकि ग्राम पंचायत सचिव सरपंच और रोजगार सचिव के ऊपर जनपत पंचायत के इंजीनियर महोदय भी होते हैं जो इनका काम होता है निर्माण कार्य को स्टीमेट के अनुसार करवाना और निर्माण कार्य के दौरान और औचक निरीक्षण करना मगर यहां माजरा कुछ और नजर आता हुआ आ रहा है इंजीनियर महोदय तो आते हैं मगर सचिव महोदय और सरपंच के द्वारा एस्टीमेट का हवाला दिया जाता है और कहा जाता है कि 5 लाख 45000 हजार की लागत से अनंतपुरा ग्राम में नाली में विजय स्तंभ से विजय जैन के घर तक बनने वाली बाउंड्री बाल बिना ही नी डाले  डायनामेंट मशीन से गढ्ढा खुदवा कर सरिया को पत्थर में गाड़ दिया गया और निर्माण कर प्रारंभ भी हो चुका आप पूरे मामले में भ्रष्टाचारी किस ठहराया जाए यह तो सोचने वाली बात होगी क्योंकि जब जिम्मेदार अधिकारी ही चुप्पी साथ कर पूरे निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं तो फिर जिम्मेदार कौन किस पर होगी कार्रवाई क्या बाउंड्री वॉल  निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा


इनका कहना है कि  आपके द्वारा ग्राम पंचायत अनंतपुरा में चल रहे मनरेगा के तहत बाउंड्री वॉल में जमीन मजबूत करने की जगह  ड्रिल मशीन से सरिया को जमीन में गड़ा जा रहा है तुरंत ही अनंतपुरा ग्राम पंचायत में चल रहे निर्माण कार्य की जांच करवाती हूं जो भी दोषी पाया जाएगा उन पर कार्रवाई की जाएगी

मनीषा चतुर्वेदी जनपद पंचायत सीईओ देवरी

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।