देवास।जिले के नगरीय निकायों में “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत जल संरचनाओं की जा रही है साफ-सफाई

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देवास।हाटपीपल्या के नरसिंह घाट की साफ-सफाई, कांटाफोड़ सभी की सहभागिता से जल संरचनाओं का किया जा रहा जीर्णोद्धार

यह अभियान भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें कर रहा है तैयार-कलेक्टर श्री सिं
कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह एवं सीईओ जिला पंचायत श्री हिमांशु प्रजापति के मार्गदर्शन में जिले में “जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से जल संरचनाओं के निर्माण एवं गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले की नगरीय निकायों में जल संरचनाओं की साफ-सफाई की जा रही है तथा जनसहयोग से गहरीकरण भी किया जा रहा है। जिले की नगर परिषद हाटपीपल्या के नरसिंह घाट की साफ-सफाई की गई तथा वहां संग्रहित पानी में से कचरे को बाहर किया गया। इसी प्रकार नगर परिषद कांटाफोड़ में नगर परिषद एवं जन सहयोग से जल संरचनाओं के आसपास साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा है। प्राचीन/पुराने कुएं, बावड़ियों की भी साफ-सफाई की जा रही है। नगर परिषद बागली में पानी की प्याऊ स्थापित की गई तथा वहां पर जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी प्ररेणादायी फ्लेक्स लगाकर नागरिकों को अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह ने बताया कि जल स्त्रोतों के संरक्षण एवं बारिश के पानी को सहेजने के लिए व्यापक स्तर पर “जल गंगा संवर्धन अभियान” की पहल की गई है। अभियान के तहत छोटे-छोटे प्रयासों से कार्यो को गति दी जा रही है। निश्चित ही आने वाले समय में इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आयेंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें तैयार कर रहा है। हम सभी को इस अभियान में अपना अभियान समझकर सहभागिता करना चाहिए। यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को संवारने एवं भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें तैयार करेगा।
कलेक्टर श्री सिंह ने बताया कि जिले में अभियान के तहत कार्ययोजना बनाई गई है। इसी श्रृंखला में जिले की नगरीय निकायों, जनपद पंचायतों की ग्राम पंचायतों एवं ग्रामों में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों व नागरिकों द्वारा जन आंदोलन के रूप में कार्य किया जा रहा है। इस दौरान अभियान को मूर्त रूप देने के लिए नदियां, कुएं, बावड़ियों, नालों एवं अन्य जल स्त्रोतों पर पहुंचकर साफ-सफाई एवं गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। नदी के किनारे उगी घासों, झाड़ियों की भी सफाई की गई। नदी, नालों से गाद निकालकर गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। टीम द्वारा हटाये गये कचरे को ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से उचित स्थान पर पहुँचाया गया। कलेक्टर श्री सिंह ने जिले के नागरिकों से आग्रह किया है कि वे शासन के इस महत्ती अभियान एवं जल संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान में एकजूटता के साथ  सहभागिता करें तथा अधिक से अधिक पानी बचाने का प्रयास करें

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।