देवास ।आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएंगे तब हमारा भारत एक समृद्ध, शक्तिशाली, विकसित भारत होगा – सांसद सोलंकी पत्रकार वार्ता में  सांसद सोलंकी ने बताया केंद्रीय बजट का महत्व

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं


देवास। नरेंद्र मोदी सरकार के 2025-26 के बजट को लेकर रविवार को शहर के रामाश्रय हॉल में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष रायसिंह सेंधव ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तुत किया गया यह ऐतिहासिक बजट है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और औद्योगिक क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों के विकास का विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट निर्धन, वंचित और मध्यम वर्गीय परिवारों सहित समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुंचाने वाला है।
प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तुत इस बजट में देश की चार प्रमुख जातियों – गरीब, युवा, किसान और महिलाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रधानमंत्री की दृष्टि में यही चार वर्ग हैं, जिनका विकास ही देश की प्रगति का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि यदि इन चारों वर्गों को सशक्त किया जाता है, तो निश्चित रूप से 2047 में जब देश अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तब भारत एक समृद्ध, शक्तिशाली और विकसित राष्ट्र होगा।
उन्होंने बताया कि भारत का बजट पहली बार 50 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा है। इस बजट में कृषि और उससे जुड़ी योजनाओं के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। भारत कृषि प्रधान देश है और इसीलिए कृषि की गुणवत्ता बढ़ाने, उत्पादन को दोगुना करने और जलवायु के अनुकूल अधिक उपज देने वाले बीजों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए इस बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। इसमें बड़े पुलों, रेलवे, परिवहन, फोरलेन सडक़ों और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी विशेष ध्यान दिया गया है, जिसके तहत आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेजों के विकास के लिए 11.21 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
सांसद सोलंकी ने कहा कि जब देश आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तब भारत एक विकसित राष्ट्र बनना चाहिए। इसी दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यह बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में प्रस्तुत किया है। उन्होंने दोहराया कि इस बजट में गरीब, युवा, किसान और महिलाओं को केंद्र में रखा गया है, क्योंकि इन्हीं वर्गों के सशक्तिकरण से भारत की प्रगति सुनिश्चित होगी।
ग्रामीण विकास पर भी इस बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मानते हैं कि भारत गांवों का देश है और ग्रामीण विकास के बिना संपूर्ण विकास संभव नहीं है। इसीलिए ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए 2.67 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे और पलायन को रोका जा सकेगा। इसके अलावा, शहरी विकास और परिवहन के लिए 6.45 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे शहरों में आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी बजट ने महत्वपूर्ण स्थान दिया है। यह सुनिश्चित किया गया है कि देश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ और व्यापक स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हों और कोई भी शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए 2.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में इस बजट में विशेष निवेश किया गया है। इसमें रेलवे, परिवहन, फोरलेन सडक़ों, पर्यटन और उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास के लिए 11.21 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए आयकर में भी बदलाव किए गए हैं। अब 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कोई कर नहीं लगेगा, जिससे मध्यम वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित थे। संचालन भाजपा जिला मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र चौधरी ने किया।  अंत में आभार जिला सह मीडिया प्रभारी कमल अहिरवार ने माना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।