देवास । सोनकच्छ तहसील की ऐनाबाद पंचायत में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर अंधेर नगरी चौपट राजा सा आलम,फर्जी बिलों की आई बाढ़

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देवास ।आज जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार बड़े-बड़े कार्यों  को अंजाम दे रही है। वहीं  सोनकच्छ तहसील की ऐनाबाद पंचायत में सारे कार्य विफल होते हुए नजर आ रहे हैं। सरपंच सचिव की मनमानी से फर्जी बिल बनाने से नहीं कतरा रहे हैं। एक-एक लाख तक के बिल बिना हस्ताक्षर और सील मोहर के ऑनलाइन अपडेट हो रहे हैं। जिस पर शासन प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। आज डॉ मोहन यादव सरकार गली-गली और गांव-गांव कई योजनाओं को आमजन तक पहुंचा रहे हैं। जैसे स्वास्थ्य भारत मिशन हो या आवास योजना या नल जल योजना या हो पक्की सड़क सभी प्रकार की योजनाएं मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान की जा रही है। और शासन का खजाना भी जनता के हित के लिए पंचायत के खाते में डाला जा रहा है। लेकिन कुछ जनता के प्रतिनिधि जनता को ही और शासन प्रशासन को पलीता लगाने में जुटे हैं। और जनता जो अपना मत याने कि मतदान कर कर एक अध्यक्ष चुनती है जिसे हम सामान्य भाषा में सरपंच कहते हैं। वही अपने अधिकारों का अनुचित उपयोग कर शासन को चुना लगाने में जुटे हैं ऐसा ही आलम देवास जिले की सोनकच्छ विधानसभा के अंतर्गत आने वाली पंचायत एनाबाद का है जहां पर सरपंच सचिव लापरवाही करते हुए शासन के नियम को ताक में रख कर आपस में मिलकर ऐसे बिल लगा रहे हैं जिसमें कई बिलों में हस्ताक्षर ही नहीं है। तो किसी में सील मोहर का अतापता तक नहीं है। और बिल एक के बाद एक पास भी होते जा रहे।

*3 जनवरी 2025 को लगाया था 95000 का बिल*

3 जनवरी 2025 को जय भोलेनाथ दूध डेरी दुकान का बिल ऐनाबाद पंचायत में लगाया गया जिसमें दुकानदार मालिक के हस्ताक्षर तो है। लेकिन सील गायब साथ ही सरपंच सचिव के हस्ताक्षर और सेल का भी अता-पता तक नहीं।

*दो और बिल लगे अजीबो गरीब*

ऐनाबाद पंचायत में 2 बिल ऐसे लगे जिसकी फोटो शायद भगवान ने ही गायब कर दी हो। याने कि कोरा कागज ही ऑनलाइन चढ़ा दिया। 10 फरवरी 2025 को जिसका बिल आई डी न. 14918258 जो कि 6000 रुपए का लगाया गया। वही दूसरा बिल आई डी न.4918213 जो कि 13650 रुपए का लगाया गया। जो कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है।

*सी सी रोड निर्माण में भी 152000 का फर्जी बिल*

जी हां सी सी रोड निर्माण मोड़सिंग के घर से लेकर कालुसिंह के घर तक जो 10 फरवरी को 152000 बिल ऑनलाइन चढ़ाया गया वह भी बिना हस्ताक्षर किए और सील मोहर के लगा दिया। ऐसे कई कारनामे ऐनाबाद पंचायत में जांच के दौरान देखने को मिलेगे।

*सोखता गड्ढा से लेकर सी सी रोड निर्माण में भी गबन*

ऐनाबाद पंचायत में सोखता गड्ढे बनाए गए थे जो की जमीनी स्तर  पर कम लागत और बिल में अधिक लागत दर्शाई गई। वही सी.सी रोड,नल जल योजना, मुख्यमंत्री आवास योजनाओं में भी भारी गड़बड़ी की गई है।

अब देखना यह है कि शासन प्रशासन इस विषय में कब कार्यवाही करता है।
जल्द ही अगले प्रकाशन में……..
1. आवास योजना में जरूर मंद को प्राथमिकता नहीं।
2. स्टॉप डेम की मरम्मत ठीक से नहीं।
3. सी.सी रोड का निर्माण कार्य अधूरा व घटिया निर्माण।
4. आवास योजना की लिस्ट में गड़बड़ी।
5. समय समय पर पंचायती बैठक नहीं।
6. पंचों के मानदेय में पंचों के हस्ताक्षर नहीं।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।