धामनोद ।गायत्री शक्तिपीठ ट्रस्ट का पुनर्गठन

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धामनोद। धार । गायत्री शक्तिपीठ धामनोद पर ट्रस्ट पुनर्गठन बैठक हुई जिसमें नए ट्रस्टियों का मनोनयन किया गया एवं पुराने ट्रष्टियों को विदाई दी गई ।
उपस्थित परिजनों ने सर्व सम्मति से श्री शांतिलाल जी विश्वकर्मा को मुख्य ट्रस्टी का दायित्व दिया, साथ में सहायक प्रबंध ट्रस्टी का दायित्व श्री मुकेश कुमार जी गुप्ता को दिया गया ।
विस्तृत जानकारी देते हुए शक्ति पीठ के प्रेस प्रतिनिधि देवकरण पाटीदार ने बताया कि
इसके अलावा भाई दिनेश जी पाटीदार, भाई ओम जी पंवार ,भाई अजय जी तारे, भाई रविंद्र जी विश्वकर्मा, दीदी पार्वती जायसवाल ,
दीदी अरुण गुप्ता, और दीदी नलिनी सोनोने को सदस्य ट्रस्टी मनोनीत किया गया।
चार प्रबंधन समितियों का भी गठन किया गया । इसके अलावा 5 ट्रस्टी एवं प्रबंधन समितियो से दो – दो सदस्य लेकर कार्यकारिणी समिति का भी गठन किया गया,जिसमें देवालय प्रबंधन समिति से रूपा दीदी, और श्री राजोरिया जी भाई साहब,विधि वित्त समिति से श्री हेमंत जी गुप्ता भाई साहब और श्री अनूप जी सक्सेना ,संगठन प्रबंधन से दीदी संगीता पगारिया ओर श्री भंवर सिंह जी चौहान तथा आंदोलन प्रबंधन से श्री हरिशंकर जी पाटीदार और दीदी दुर्गा पाटीदार का मनोनयन किया गया ।
समस्त पुनर्गठन की कार्रवाई जिला समन्वयक श्री प्रभाकर राव सोनोने जी की उपस्थिति में संपन्न हुई।
अंत में पूर्व प्रबंधक ट्रस्टी भाई हरिशंकर जी पाटीदार ने सबका आभार माना ।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।