नए आपराधिक कानून के लिए सागर पुलिस पूरी तरह तैयार रहकर, आमजन को भी कर रही है इसके प्रति जागरूक

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आमजन में इसके प्रचार प्रसार करने की कड़ी में, पुलिस टीम  शहर,जिले  की विभिन्न कोचिंग संस्थानों स्कूल ,कालेजों में स्टूडेंट्स के बीच पहुंच कर नए कानूनों के बारे बताएगी ।

शहर के सभी थानो मे लगाए, भारतीय न्याय संहिता एंव भारतीय दण्ड संहिता के तुलनात्मक विवरण के पोस्टर ।

भारत सरकार के निर्देशानुसार आगामी 1 जुलाई 2024 से नवीन आपराधिक कानून 2023 लागू हो रहे है, जिसके सफल क्रियान्वयन हेतु सागर पुलिस के समस्त अधिकारी/कर्मचारी भी पूरी तरह से प्रशिक्षित होकर कार्यवाही करें तथा आमजन  भी इस संबंध में जागरूक रहे, सभी वरिष्ठ अधिकारियों  द्वारा समस्त अधिकारियों को प्रशिक्षण कार्यशालाएं व  आम जनता में भी इसका प्रचार प्रसार हेतु कार्यवाही के दिशा-निर्देश दिये गये है। उक्त निर्देशों के अनुक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री संजीव उइके, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री लोकेश कुमार सिन्हा  के मार्गदर्शन में विगत दिनों से लगातार पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नए आपराधिक कानून-2023 की प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही है साथ ही आम नागरिकों के बीच जाकर भी नए कानून के विभिन्न प्रावधान व  सुविधाओं के बारें में प्रचार प्रसार किया जा रहा छात्र, छात्राओं को नवीन आपराधिक कानूनों के विभिन्न प्रावधानों के बारें में विस्तृत रूप से जानकारी दी जा रही हे
पुलिस टीम ने सभी को बताया कि तीनों नवीन कानून – भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाये गए है। इसमें महिलाओं व बच्चों से संबंधित अपराधों में पीड़ितों की समस्याओं को केंद्र में रखकर, अपराधियों के लिए और कड़ी सजा आदि पर ध्यान दिया गया है। कही पर भी घटना होने पर परिस्थिति वश कही पर भी FIR की सुविधा तथा E-FIR का भी प्रावधान है ।
नये कानून में डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक साक्ष्यों के महत्व को बढ़ाया गया है एवं हर चीज की समय सीमा को निर्धारित किया गया है कि, कितने समय में विवेचना पूर्ण करके चार्ज शीट पेश करना है और केस की अपडेट पीड़ित को समय सीमा में दी जाएगी। गवाह व पीड़ित आदि के बयान की वीडियो ग्राफी तथा बयान  इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से लेने की भी प्रक्रिया है। पुलिस टीम ने उन्हें नए व पुराने कानूनों के तुल्नात्मक चार्ट और प्रावधानों को पीपीटी व पोस्टर आदि के माध्यम  से समझाया ।

इसी अनुक्रम में सागर पुलिस द्वारा लगातार पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को  नवीन आपराधिक कानूनों के संबंध में प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न एप जैसे ई साक्ष्य ,ई संकलन आदि के बारे में भी जानकारी दी गई है एवं सभी कर्मचारियों के मोबाइल में इसको डाउनलोड भी करवाया गया है

साथ ही आमजन को भी इसका ज्ञान हो इसको ध्यान में रखते हुए सागर जिले के सभी थानो मे भारतीय न्याय संहिता एंव भारतीय दण्ड संहिता के तुलनात्मक विवरण के पोस्टर लगाये गये ताकि थाने पर आने वाले किसी भी फरियादी एंव आमजन को नवीन अपराधिक कानून की विभिन्न धाराओं व प्रावधान के बारे में जानकारी रहे और  वे किसी भी प्रकार से भ्रमित ना रहे।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।