पक्ष विपक्ष के बीच केंद्रीय अंतरिम बजट को लेकर बयानबाजी

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रायपुर/छत्तीसगढ़।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज सदन में अंतरिम बजट पेश किया। कांग्रेस के कई सांसदों ने इस अंतरिम बजट को निराशाजनक करार देते हुए कहा कि इसमें आम जनता के लिए कुछ भी नहीं है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज सदन में अंतरिम बजट पेश किया। इस अंतरिम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा, ‘बजट भाषण बहुत छोटा और निराशाजनक था। उन्होंने कहा इसमें बहुत अधिक बयानबाजी थी। कई मुद्दों को छुआ नहीं गया। बेरोजगारी जैसे मुद्दे का उल्लेख ही नहीं किया गया।’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह सरकार अपनी विफलता को भी सफलता को रूप में पेश करेगी। आम भारतीय मतदता से पूछिए कि सरकार की नीतियों से उसकी जेब में क्या मिला तो इसका जवाब मिल जाएगा कि देश का आम आदमी क्या सोचता है।’

बस्तर सांसद व पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने भी बजट को निराशाजनक बजट बताया हैं और कहा कि यह बजट लोकहित का नही हैं फेल बजट है। इसमें महंगाई और बेरोजगारी पर कुछ नही हैं । बजट में आम वर्गों,किसानों, व्यपारियो के लिए कुछ नही हैं।

वंही पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज के द्वारा दिये गए बयान के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा की जब पूरा देश बजट पर खुशी जता रहा हैं… तो विपक्ष तो रोयेगा ही..साल के शुरुवात में देश के लिए लाए वाये बजट को ऐतिहासिक बताया हैं  इस सर्वोत्तम बजट पर विपक्ष का जो बयान आना है  वह तो आएगा ही लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के पथ पर दौड़ रहा हैं..जिसे विपक्ष पचा नही पा रहा हैं।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बताया बजट को रोने वाला https://youtu.be/E-II0A7BW_c?si=cC_YC9lEjIFqXqts

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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