पत्रकार कल्याण महासंघ की बैठक सागर में संपन्न

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सागर
सागर में पत्रकार कल्याण महासंघ की बैठक सागर में संपन्न हुई जिसमे पत्रकार कल्याण महासंघ के कार्य प्रदेश अध्यक्ष रामबाबू सिंह परिहार के अध्यक्षता में संपन्न आज सागर में संपन्न हुई जिसमे महासंघ को मजबूती देने के लिए विचार विमर्श किया गया रामबाबू सिंह परिहार ने कहा की ये संगठन एक परिवार की तरह जिसमे सभी सदस्यों को समान अधिकार दिए गए जिसमे सभी पत्रकारों के हितों की रक्षा की जाएगी पत्रकार कल्याण महासंघ सभी पत्रकार साथियों के सुख-दुख में साथ है जहां-जहां पत्रकारों के हितों की बात आएगी वहां वहां हमारा संगठन पूर्ण निष्ठा के साथ उसके साथ खड़ा रहेगा
पत्रकार कल्याण महासंघ के दिनेश शिल्पी ने कहा की इसमें नए सदस्यों को जोड़ने की प्रक्रिया प्रारंभ होने वाली है जिसमे जो पत्रकार भाई अभी संगठन से नही जुड़े है।उन को जोड़ने का प्रयास किया जायेगा ।इस मौके पर दैनिक परिहार गर्जना के प्रबंध संपादक बिक्रम सिंह परिहार, उपसंपादक अजय सिंह परिहार ,सागर ब्यूरो चीफ विजय निरंकारी, पवन शर्मा ,नईम मकरानी ,विकास शर्मा सहित कई सदस्य मौजूद रहे

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।