प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना बनी मजाक

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प्राइवेट व सरकारी संस्थानों के डॉक्टर नहीं लिख रहे जेनेरिक दवाएं

87 फीसदी सस्ती दवाओं के काउंटर सूने
भोपाल (केमिस्ट जागरण)
ब्रांडेड दवाओं से 87 फीसदी तक सस्ती जेनेरिक दवाओं के शहर में 8 प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र के काउंटर सूने पड़े हुए है। दूसरी तरफ महंगी दवाएं बेचने वाले दवा स्टोर पर खरीदारों की भीड़ है। दरअसल भरीजों का इलाज करने वाले प्राइवेट व सरकारी डॉक्टर प्रिस्क्रिप्सन (पर्चे) पर अडिड या खास कंपनी की दवा लिखते हैं। मरीज समझता है कि जिस नाम से दवा लिखी वो उसी से ठीक होगा। इस कारण इन दवाओं को कम लोग ही अपना रहे हैं।

जन औषधि केंद्रों में बाजार से काफी कम कीमत में दवाएं मिल रही हैं। ब्लड प्रेशर की एम्लोडिपाइन-मेटोभेलोल सक्सिनेट साल्ट बाली दवा की 7 गोली का पता जन औषधि केंद्र में 11 रुपए का मिल रहा है जबकि मैक्लायड कंपनी की दया का पता 135 रुपए का है। जन औषधि व विभिन दवा कंपनियों की ब्रांडेंट दवाओं के रेट में काफी अंतर है। बीपी, हाईपरटेंशन थायराइड, एंटी एलर्जिक, एंटीबॉपेटिक्स सहित सैकड़ों दवाएं जन औषधि केंद्रों में बाजार के मुकाबले 71 से 87 प्रतिशत कम रेट पर मिल रही हैं।

किफायती दाम पर उच्च
गुणवत्ता की दवाएं

भारत सरकार की ओर से शुरू की गई दवा दुकानों पर उच्ब गुणवत्ता की दवाएं किफायती दामों पर मरीजों को उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना शुरू की गई है। इस योजना में ब्लड प्रेशर, हार्ट, डायबिटीज, कैंसर, गेस्ट्री, विटामिन्स, एंटोनिटिक सहित 800 से अधिक दवाएं सस्ती दरों पर इन केंद्रों में मिल रही हैं।
यदि समझ नहीं आ रहा तो हम समझाते हैं रेट का अंतर

  • बलड प्रेशर की दवा मेट्रोपोलॉल सक्ससेनेट एंड एमलेडिपाइन टेबलेट-5/50 एमजी जन औषधि केंद्र का 7 टेबलेट का पता 11 रुपए का आ रहा है।

एमलोबास-एम 5/50 टेबलेट मैक्लायड कंपनी की टेबलेट है। यह इसका ब्रांडेड नाम है। इस दवा में भी मेट्रोधोलॉल सक्सीनेट एंड एमलेोडियइन टेवलेट-5/50 एमजी हुग है। 10 टेबलेट के पते की एमआरपी 135 है। गैस की दवा पेंटाप्राजील सोडियम गेस्ट्रो रेसिस्टेंट एंडोमपेरीडोन फ्रीलांग रिलीज के 10 कैप्सूल के पत्ते की कीमत जन औषधि केंद्र में 22 रुपए है।

  • दवा पैटोप डीएसआर टेबलेट एरिस्ट्री कंपनी की दवा है। इसमें भी पेटायातोल मीडियम गेस्ट्रो रेसिस्टेंट एंड डोमपेरीडोन प्रोलांगड रिलीज इग है। 10 कैप्सूल के पत्ते की कीमत 210 रुपए है।

केंद्र सरकार के जन औषधि केंद्रों का प्रमोशन सबसे जरूरी है जिससे लोगों को पता चले कि बेहतर गुणवता को दवाएं कम कीमत पर मिल रही हैं। जन औषधि केंद्रों को सरकारी अस्पताल परिसरों में भी खुलना चाहिए। सरकार इन दवाओं की गुणवत्ता की रिपोर्ट भी समय-समय पर पब्लिश करना

चाहिए। जहां तक आईएमए की बात है संगठन के पदाधिकारी चिकित्सकों के बीच

जन औषधि को प्रचारित करेंगे। डॉ. अमित रघुवंशीर

डॉक्टर नहीं लेते हैं रुचि

  • एंटी एलर्जिक दवा मटिलुकास्ट सोडियम लेवेोमेरिटरिजिन थड्रोक्लोराइड गबाली 10 टेबलेट का पता जन औषधि केंद्र में 20 रुपर का आ रहा है।
  • मंटियर एलसी टैबलेट सिप्ला कंपनी की है। 15 टेबलेट चाले पत्ते की कीमत 336 रुपए है। • डायबिटीज की दवा ग्लिमप्रइड 1 एमजी

हमारा जन औषधि केंद्र जनकगंज

में संचालित हो रहा। है। केंद्र सरकार बेहतर गुणवत्ता वाली सभी दवाएं काफी सस्ती दर पर मरीजों को उपलब्ध करा रही है। बाजार की तुलना में यह दवाएं 37 प्रतिशत तक सस्ती हैं। ऐसे में जो मरीज इन केंद्रों से दवा खरीदते हैं उनको काफी राहत मिली है। सरकार को जन औषधि केंद्रों के प्रमोशन के साथ ऐसी व्यवस्था करन चाहिए कि केंद्रों पर ज्यादा मरीज आएं।

बीपी की दवा एमलोडिपिन 5 एमजी का पता जन औषधि में 4 रुपए का है। बाजार में इस दवा का औसत मूल्य 21 रुपए है। जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने पर मरीज की 81 प्रतिशत बचत होती है। सटे की दवा एटीनौल 50 एमजी की स्ट्रिप जन औषधि केंद्र पर 5 रुपए की मिलती है जबकि बाजार में इस दवा का रेट 20 रुपए है। जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने पर मरीज की 75 प्रतिशत बचत होती है। चोपी की दवा लोसार्टन 25 एमजी की स्ट्रिय जन औषधि केंद्र पर 5 रुपए की मिलती है जबकि बाजार में इस दवा का रेट 33 रुपए है। जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने पर मरीज की 85 प्रतिशत बचत होती है। हार्ट की दवा कलीमिडल 75 एमजी टैबलेट की स्ट्रिप जन औषधि केंद्र पर 15 रुपए की मिलती है जबकि बाजार में इस दवा का पेट 51 रुपए है। जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने पर मरीज को 71 प्रतिशत बचत होती है। पटोस्थास्टेटिन 10 एमजी टेबलेट की स्ट्रिप जन औषधि केंद्र पर 6 रुपए की मिलती है जबकि बाजार में इस दवा का रेट 45 रुपए है। जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने पर 87 प्रतिशत बचत होती है।

टेबलेट जन औषधि केंड में 4 रुपए 40 पैसे का आ रहा है।

मिलमडा टेबलेट सिफ्ना कंपनी की है। यह दवा की एमआरपी 40 रुपए है।

केंद्र माकार लियर सहित देश भर में जन औषधि केंद्र पर मरीजों को उच्च गुणवता बाली साती दवाएं उपलब्ध करा रही है लेकिन इन केंद्रों पर मरीज कम संख्या में पहुंच रहे है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि अधिकांश डॉक्टर मरीज को जन औषधि केंद्र जाने की सह ही नहीं देते हैं। हमारा संगठन केंद्र सरकार से मांग करेगा कि ऐसे नियम बनाए जाएं जिससे मरीज सस्ती दवाएं मिल सके।

विष्णु सिंघल, अध्यक्ष, ग्वालिया केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूशन फेडरेशन, ग्वालिय

प्रइवेट क्लीनिक व अस्पतालों के चिकित्सक मरीजों को ब्रांडेड व ज्यादा मार्जिन देने वाली कंपनियों की दवा लिखते हैं वहीं सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर जेनरिक दवा लिखते हैं जिस पर दया की एमआपी सही कीमत से 10 गुना तक ज्यादा होती है। ऐसे में मेडिकल स्टोर संचालक कमीशन के लिए इन्हें एमआरपी पर कुछ परसेंट डिस्काउंट पर बेच देते हैं। जहां तक जन औषधि केंद्र की बात है तो इन पर उपलब्ध दवाएं कोई भी डॉक्टर नहीं लिखता है। ऐसे में कुछ ही मरीज जन औषधि केंद्रों तक पहुंच पाते हैं। ये मरीज को होते हैं जिन्हें कोई पुरानी बीमारी है अथवा वे इन दवाओं के बारे में जानते हैं।
सोर्स…आभार डीबी स्टार

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।