प्रमोद मेहता बनाए गए मंडल अध्यक्ष झांसी प्रगतिशील विश्व मौर्य परिषद अखंड भारत सामाजिक संगठन

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ललितपुर प्रगतिशील विश्व मौर्य परिषद अखंड भारत सामाजिक संगठन ललितपुर में कुश कुटी मंदिर में एक मीटिंग आयोजित की गई जिला अध्यक्ष धीरज कुशवाहा के अध्यक्षता में जिसमें में जिला में सदस्यता अभियान चलाने हेतु सभी पदाधिकारी को अवगत कराया गया जिसमें सभी ब्लॉकों में एवं तहसीलों में सदस्यता अभियान चलाया जाना है बैठक में शामिल प्रमोद मेहता मण्डल अध्यक्ष झांसी को फूल माला पहनाकर स्वागत किया एवं हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी सभी पदाधिकारी ने संगठन को मजबूत करने लिए संकल्प लिया जगदीश कुशवाहा प्रदेश मंत्री उ प्र बलराम कुशवाहा वरिष्ठ महामंत्री विजय कुशवाहा मसोरा जितेन्द्र कुशवाहा जानकी कुशवाहा वरिष्ठ उपाध्यक्ष सोनू कुशवाहा जिला महामंत्री पर्वत सिंह कुशवाहा जिला उपाध्यक्ष रामलाल कुशवाहा खजुरिया  एवं आदि लोग मौजूद रहे ।।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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