जबलपुर में 8 साल की मासूम से रेप और मर्डर की वारदात को 6 दिन बीत चुके हैं। आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। अब गांव में ऐसी दहशत है कि लोगों ने बेटियों का घर से निकलना बंद कर दिया है। परिजन अपने बच्चों को आंगनवाड़ी भी नहीं भेज रहे हैं। शराब दुकान से होकर जाने वाले रास्ते पर तो लड़कियों और महिलाओं ने जाना छोड़ दिया है।
पड़रिया गांव की सड़कें दोपहर में सूनी पड़ी थीं। यहां इक्का-दुक्का लोग ही नजर आ रहे थे। गांव में मातम जैसा माहौल है। लोगों के चेहरे पर दहशत साफ देखी जा सकती थी। हर शख्स की जुबां पर इसी वारदात का जिक्र है। सड़कों पर बच्चे दिखाई नहीं दिए। जिस मंदिर पर रोजाना भीड़ रहती थी, शाम को वहां भी गिनती के श्रद्धालु पहुंचे। घटनास्थल के पास आंगनवाड़ी में भी कोई बच्चा नहीं दिखा। यहां ताला जड़ा था।
गांव की महिलाओं का कहना है कि वारदात के बाद से गांव में दहशत है। बच्चियां घर से बाहर निकलने से भी डरने लगी हैं। दो साल से गांव के चौराहे पर शराब दुकान खुली है, तभी से ऐसे हालात बने हैं। दुकान के पास हैंडपंप भी है, जहां से महिलाएं पानी भरती थीं, पर जब से शराब दुकान खुली, तब से पानी लाना छोड़ दिया। महिलाओं ने बताया कि पानी भरने जाएं, तो वहां शराब पीते हुए लोग बैठे रहते हैं।

गांव में आंगनवाड़ी पनागर चौराहे पर स्थित शराब दुकान के पीछे है। महिलाओं का कहना है कि सुबह से शराबी आंगनवाड़ी के आसपास बैठ जाते हैं। कई बार तो ऐसा हुआ कि पानी लेने के लिए शराबी आंगनवाड़ी में तक घुस आए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि घटना के बाद से परिजन ने बच्चों को यहां भेजना बंद कर दिया है।
नाम जाहिर न करने की शर्त पर लोगों ने बताया कि जिस बच्ची की हत्या हुई, वह भी आंगनवाड़ी जाती थी। जब उसके साथ ऐसी घटना हो सकती है, तो हमारे बच्चों के साथ कुछ भी हो सकता है। घटना के बाद से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी नहीं आ रही है। रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद आंगनवाड़ी को गांव के अंदर दूसरी तरफ शिफ्ट कर दिया गया है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का कहना है कि जो घटना उस बच्ची के साथ हुई, वह कभी भी हमारे साथ या फिर गांव की दूसरी बच्चियों के साथ हो सकती है।



