बिजली विभाग की बेवफाई उपभोक्ताओं को बर्दाश्त नही

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गौरझामर। जैसे जैसे गर्मी का प्रचण्ड प्रकोप बढ रहा है लोग इससे बचाव  व राहत के लिए पंखा ,कूलर ,एसी आदि का सहारा ले रहे है इस भीषण गर्मी   व लू  के थपेडो मे पेडो की नैसर्गिक शीतल  छाया भी  नही बचा  पा रही है वहां भी लोग गर्मी से तो बचाव तो कर लेते है लेकिन उमस से वह वहां भी पसीना पसीना हो जाते है गर्मी के इस असहनीय मौसम मे मप्र पू क्षे वि वि क लि ,की अनियमित विधुत आपूर्ति की त्रृटि पूर्ण सेवाओ से  उपभोक्ताओं मे गहन असंतोष है भीषण व जानलेवा गर्मी मे बेनागा विधुत आपूर्ति के स्थान पर दिन व रात मे कई बार बिना सूचना व  मुनादी के घन्टो विधुत कटौती लोगो का गुस्सा सातवे  आसमान पर पहुंचा रही है इस सम्बन्ध मे उपभोक्ताओं के व्दारा केसली ,रहली तथा सागर कार्यालयो मे बैठे बरिष्ठ  अधिकारियो का ध्यान  कई बार आकर्षित कराने के बाद भी विधुत कटौती मे सुधार नही किये जाने से उपभोक्ताओं ने सख्त लहजे मे कहा है की अब विधुत क,की बेवफाई बर्दाश्त के बाहर होती जा रही है  विभाग यदि इस पर गम्भीरता पूर्वक विचार नही करता तो  गौरझामर व आसपास के गांवो के पीडित परेशान उपभोक्ताओ  ,किसानो का कहना है की वह मजबूरी मे विधुत अव्यवस्था के खिलाफ सामूहिक रुप से जन आंदोलन  करने को विवश होगे  ,जनापेक्षा है विधुत क,विधुत उपभोक्ताओ की विधुत समस्याओ का भली भांति समझेगा।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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