बीना की कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे नगर पालिका के सामने बैठी धरने पर चार घंटे दिया धरना

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बीना
प्रोटोकॉल के उल्लंघन कर विधायक को पर्याप्त सम्मान न दिए जाने के विरोध में विधायक निर्मला सप्रे नगर पालिका परिषद के बाहर बने पार्किंग जोन में धरने पर बैठ गई।
दरअसल में नगर पालिका की साधारण सभा की बैठक आज संपन्न होना थी इस बैठक में विधायक निर्मला सप्रे को भी आमंत्रित किया गया था किंतु सीएमओ इशांत धाकड़ और नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार द्वारा उन्हें बैठक में पहुंचने पर पर्याप्त सम्मान और सम्मानजनक स्थान नहीं दिए जाने से यह नाराज हो गई और कांग्रेसी पार्षदों के साथ मीटिंग से बाहर आकर धरने पर बैठ गई।
बाद में एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने विधायक को समझाइश दी किंतु उनके न मानने पर सीएमओ इशांक धाकड़ ने खेद व्यक्त किया और विधायक निर्मला सप्रे को जूस पिलाकर धरने से उठाया।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।