बीना विकासखंड शिक्षा अधिकारी जाटव को किया निलंबित

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सागर
संभागायुक्त डा. वीरेन्द्र सिंह रावत ने बीना विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री आर.के. जाटव द्वारा जांच कार्य में विलंब एवं लापरवाही बतरने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। अनुविभागीय अधिकारी अनुभाग बीना द्वारा 31 जनवरी को प्रस्तुत प्रतिवेदन में लेख किया गया था कि आवेदकगण श्री हरिओम एवं अन्य से प्राप्त आवेदन पत्र की जॉच हेतु मूल आवेदन पत्र श्री आर.के. जाटव को प्रेषित किया गया। किन्तु विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बीना द्वारा उक्त प्रकरण की जाँच में कोई रूचि नही ली गयी। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी से जाँच प्रतिवेदन के संबंध में समक्ष में पूछे जाने पर उनके द्वारा अवगत कराया गया कि प्राचार्य श्री मंसूरी द्वारा प्रस्तुत पत्र का जबाव प्रेषित नहीं किया गया एवं जाँच में सहयोग नहीं किया जा रहा है। इसके विपरीत यह भी कहा गया कि जाँच इतनी जल्दी क्यो करनी है। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी से पुनः जाँच के संबंध में पूछे जाने पर उनके द्वारा कोई समाधानकारक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही कार्यालय में पुनः उपस्थित हुये।
कलेक्टर श्री दीपक आर्य द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का अवलोकन एवं परीक्षण करने के उपरांत श्री आर०के०जाटव द्वारा जॉच कार्य में विलंब एवं लापरवाही करना पाया गया। श्री जाटव का उक्त कृत्य अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में स्वेच्छाचारिता एवं अनुशासनहीनता का द्योतक होकर म०प्र० सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उपनियम का उल्लघंन है। श्री जाटव को म०प्र० सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 09 अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में श्री जाटव का मुख्यालय, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी जिला सागर नियत किया गया हैं। निलंबन अवधि में श्री जाटव को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।