मध्य प्रदेश की एकमात्र रात्रि कालीन हिंदी दैनिक समाचार पत्र टुडे एमपी एक्सप्रेस से जुड़ने का सुनहरा मौका

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भोपाल/मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एवं सागर जिले से प्रकाशित मध्य प्रदेश का पहला एकमात्र ऐसा अखबार जो रात्रि कालीन हिंदी दैनिक  अखबार है ।

            अभी तक आपने प्रातः कालीन और दोपहर तथा शाम के अखबारों के नाम सुने होंगे किंतु मध्य प्रदेश की पत्रकारिता के इतिहास में पहली बार रात्रि कालीन हिंदी दैनिक समाचार पत्र टुडे एमपी एक्सप्रेस का डिजिटल संस्करण शुरू किया गया है इसके लगभग 200 से अधिक अंक प्रकाशित किये जा चुके हैं और लगभग 23000 से भी अधिक दर्शक व पाठक इस अखबार के बन चुके हैं ।      

           अखबार के प्रधान संपादक राजेश जैन के अनुसार जल्दी अखबार को अब 8 पेज का किया जा रहा है अखबार का डिजिटल अंक प्रतिदिन रात्रि 8:00 बजे से 9:00 के बीच में प्रकाशित किया जाता है आपको बता दें कि टुडे एमपी एक्सप्रेस के इस डिजिटल अंक से जुड़ने के लिए और आपको रिपोर्टर बनने का एक चांस देने के लिए टुडे एमपी एक्सप्रेस तैयार है ।आप टुडे एमपी एक्सप्रेस के मोबाइल नंबर 8770315155 पर कॉल करके इस अखबार से जुड़ सकते है और रिपोर्टर बन सकते हैं । रिपोर्टर बनने के लिए और अखबार से जुड़ने के लिए आप आज ही इस नंबर पर कॉल करें।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।