रिंग रोड के पुनर्निमाण के अभाव मे मेन रोड पर वाहनो का दबाव बढा

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गौरझामर। नागरिको के बार बार अनुरोध के बावजूद ग्राम पंचायत गौरझामर वार्ड नम्बर सात के प्रमुख रिंग रोड मार्ग के पुनर्निर्माण की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नही दे रही है परिणाम स्वरूप इस मार्ग पर भारी वाहनो की भरमार के कारण यह सडक काफी दयनीय हालत में पहुंच गई है जगह-जगह सीमेन्ट कंक्रीट उखड जाने से गड्ढे घातक रूप ले चुके है सडक के बीचो बीच पक्की व बडी पुलिया नही बनाये जाने से फूलबाग ,मेन रोड, बस स्टेन्ड की ओर से बहकर आने वाला पूरा बरसाती पानी तीव्र वेग से इसी सडक के ऊपर से होकर निकलता है जिससे सडक के बीच मे कटाव बन गया है जो वाहनो के आवागमन  बाधक है बता दे की इस रिगरोड के बनने से मेनरोड पर वाहनो का दबाव काफी कम हो गया था क्योकि नगर मे जाने वाले सभी छोटे बडे टु व्हीलर, फोर व्हीलर वाहन इसी शार्ट कट रिगरोड मार्ग से ही आवागमन करते थे जिससे बसस्टेण्ड व मेन रोड पर वाहनो का दबाव काफी कम हो जाता है बता दे की जबसे  यह सडक खराब व गड्ढो मे तब्दील हुई है तभी से वाहन इस रोड से सीधे न जाकर बसस्टेण्ड से होकर घुमाव दार मार्ग से नगर प्रवेश करते है जिससे मेन रोड पर वाहनो का दबाव काफी बढ गया है इससे बसस्टेण्ड मेनरोड पर जाम लगने व आये दिन दुर्घटनाये होने की खबरे मिल रही है उल्लेखनीय है की कथित क्षतिग्रस्त रिगरोड की लंबाई महज सौ मीटर है यह सडक मेनरोड से पुरानी ग्राम पंचायत के पास से तारासेन के यहा से जैनमन्दिर होते हुए पुराना एन एच छब्बीस मार्ग से मिलता है इस क्षतिग्रस्त सडक का पचायत शीध्र ही पुलिया सहित पुनर्निर्माण बरसात पूर्व कराये ऐसी जनापेक्षा है।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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