ललितपुर।पौधाशाला, वृक्षारोपण एवं वानिकी कार्यों पर कार्यशाला

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ललितपुर। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक योजना एवं कृषि वानिकी लखनऊ के आदेशानुसार प्रत्येक प्रभाग में 15 से 20 दिसम्बर 2024 के मध्य पौधाशाला, वृक्षारोपण एवं वानिकी कार्यों से सम्बन्धित गोष्ठी/कार्यशाला का आयोजन गोविन्द सागर पौधशाला में वन संरक्षक/क्षेत्रीय निर्देशक, बुन्देलखण्ड वृत्त झांसी महावीर कौजालगी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। सर्व प्रथम मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। डीएफओ गौतम सिंह ने उपस्थित अधिकारियों/कर्मचारियों को विस्तृत जानकारी से अवगत कराते हुये आगामी वृक्षारोपण हेतु माईक्रोप्लानिंग, स्थल चयन तथा स्थल के अनुरूप पौधों की प्रजाति का चिन्हीकरण एवं ग्राम पंचायत/स्थानीय नगर निकाय की सहभागिता से भी अवगत कराया। इसके उपरान्त नर्सरी में पौध उगान के सम्बंध में उप प्रभागीय वनाधिकारी महरौनी सतेन्द्र सिंह तोमर द्वारा जानकारी दी गयी। अग्रिम मृदा कार्य के सम्बंध में क्षेत्रीय वन अधिकारी, महरौनी द्वारा विस्तार से सभी उपस्थित कर्मचारियो को अवगत कराया। क्षेत्रीय वन अधिकारी गौना द्वारा वृक्षारोपण की सुरक्षा एवं देख-रेख पर अपने विचार, सुझावों से अवगत कराया। प्रभाग में अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में सिल्वी कल्चर ऑपरेशन, कटान के लाटों की मार्किंग व पातन में सावधानियों व वन्य एवं वन्य जीवों की सुरक्षा, मानव वन्य जीव संघर्ष आदि विषयों पर उप प्रभागीय वनाधिकारी महरौनी द्वारा विस्तार से जानकारी दी। सभी विषयों की समीक्षा पर मुख्य अतिथि वन संरक्षक/ क्षेत्रीय निदेशक झांसी द्वारा अपने विचार व सुझाव उपस्थित सभी वन अधिकारी/कर्मचारियों को अनुपालन करने हेतु निर्देशित किया। गोष्ठी में नपाध्यक्ष प्रतिनिधि मुन्नालाल, उप प्रभागीय वनाधिकारी डा.शिरीन, उप प्रभागीय वनाधिकारी महरौनी सतेन्द्र सिंह तोमर, क्षेत्रीय वन अधिकारी महरौनी सरोज कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी बार अरूण कुमार अवस्थी, क्षेत्रीय वन अधिकारी गौना सुवाष, क्षेत्रीय दन अधिकारी भोला सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी तालबेहट प्रभुदयाल यादव, क्षेत्रीय वन अधिकारी माताटीला रमेश कुमार पनौरिया, क्षेत्रीय वन अधिकारी जखौरा शहजादा स्माईल उददीन, प्रतिनिधि उच्च शिक्षा विभाग डा.रीतेश खरे, प्रतिनिधि बीएसए शिवम अग्निहोत्री, स्वास्थ्य विभाग से डा.राजेश भारती, सिंचाई विभाग से भूपेश कुमार, एआरटीओ सहित अन्य विभागों के प्रतिनिधि, मीडिया, एन.जी.ओ. के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। अंत में डीएफओ गौतम सिंह ने सभी का आभार जताया।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।