ललितपुर।भूमि संरक्षण विभाग में फेले भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार 11 दिन से नागरिक मोर्चा का धरना।

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ललितपुर ।प्रशासन है कि उसके कान पर जू तक नहीं रेंग रहा नागरिक मोर्चा के सदस्यों और मन मोहन चौबे द्वारा आज कराया गया मुंडन।
भूमि संरक्षण विभाग के भ्रष्टाचार और प्रशासन की उदासीनता के कारण आज से शुरू हुई भूख-हड़ताल।*
मनमोहन चोवे ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर लगाये गंभीर आरोप। कहा की मोर्चा के सदस्य जनपद के भ्रष्टाचार के बिरौध में 10दिन से बैठे है और यहां से सदर विधायक राम रतन कुशवाहा और राज्य मंत्री मनोहर लाल पंथ  मन्नूकोरी आये दिन हर रोज निकलते हैं पर उन्हें एक कुछ  पलों का भी समय नहीं मिला कि वह  समस्या को समझ सके।
प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के संवेदहीन रवैये से  आहत होकर उन्होंने आज नवरात्र  और मंगलवार होते हुये भी अपने और साथियों के साथ कराया  मुडंन*
अनुज सिंह ठाकुर की रिपोर्ट ललितपुर

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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