ललितपुर।महिला आयोग की सदस्या अर्चना पटेल की अध्यक्षता में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जनपद में भव्य कार्यक्रम का हुआ आयोजन।

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं


ललितपुर। अब समाज को कथनी और करनी में अंतर समाप्त कर नारी को अवसर की समानता देनी होगी- अर्चना पटेल
नारी की रक्षा व सम्मान के लिए परिवार अपने बेटों को दें अच्छे संस्कार- अर्चना पटेल
नारी सुरक्षा,स्वावलंबन व सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे हैं अनेकों कार्यक्रम, अब घरों के बिहेवियर में हो चेंज-डीए
आज, 8 मार्च 2025 को, हम विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं। यह दिन न केवल महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मानित करने का अवसर है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण, समानता और उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक भागीदारी के महत्व को भी उजागर करता है।

इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम है “महिला सशक्तिकरण: भविष्य की दिशा,” जो यह संदेश देती है कि महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना समाज, राष्ट्र और विश्व की प्रगति अधूरी है। महिलाएं हमेशा से समाज के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई हैं, चाहे वह शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, या कला हो। फिर भी, उन्हें समान अवसर, सुरक्षा और समर्थन प्राप्त नहीं होता है। इस दिन हम उनके संघर्ष, योगदान और उपलब्धियों को मान्यता देते हैं, और यह सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक समान और सुरक्षित समाज तैयार किया जाए। उक्त विचार आज शनिवार को विकास भवन सभागार में मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की सदस्य अर्चना पटेल व जिला अधिकारी अक्षय त्रिपाठी की गरमामई उपस्थिति में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि अर्चना पटेल ने अपने संबोधन में माता सावित्रीबाई फुले को नमन करते हुए महिलाओं के लिए शिक्षा के महत्व पर गहरा प्रकाश डाला और बताया कि शिक्षा की ताकत से ही आधुनिक भारत में महिलाएं प्रगति के विभिन्न क्षेत्रों में नित्य नए की समान स्थापित कर रहीं है। उन्होंने सभी से आवाहन करते हुए कहा कि केंद्र व प्रदेश की सरकार नारी सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं अब समाज को भी अपनी कथनी और करनी का अंतर समाप्त कर नारी को अवसर की समानता देनी होगी बेटाऔर बेटी में कोई भी भेद नहीं करना होगा। उन्होंने कहा कि नारी की रक्षा व सम्मान के लिए माता-पिता अपने बेटों को अच्छे संस्कार दें ताकि वह घर से बाहर जाकर बेटियों के प्रीत अच्छा भाव रखे।
इस अवसर पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने नारी विमर्श पर गहरा प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार द्वारा नारी सुरक्षा स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण के लिए निकॉन योजनाएं कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं अब आवश्यकता है घरों में महिलाओं व बेटियों के प्रति अपने विचारों व व्यवहार में बदलाव लाना।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी, जिला प्रोविजन अधिकारी नंदलाल सिंह,जिला सेवा योजना अधिकारी आकांक्षा यादव, बाल विकास परियोजना अधिकारी खुशबू ,रुचि बुंदेला सहित विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि
भारत में, महिलाओं ने प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्टता की मिसाल कायम की है। भारतीय महिलाएं न केवल अपने परिवारों की धुरी रही हैं, बल्कि वे वैश्विक मंच पर भी अपने कौशल और नेतृत्व क्षमता का लोहा माने जाने लगी हैं। भारत की महिलाएं अब विज्ञान, तकनीकी, चिकित्सा, राजनीति, और खेलों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह याद दिलाता है कि महिला सशक्तिकरण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह समाज की हर एक नागरिक का कर्तव्य है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं को उनके हक के साथ-साथ एक सुरक्षित वातावरण भी मिले, जहां वे अपने सपनों को पूरा कर सकें और अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंच सकें।

इस दिन हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे, उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करेंगे, और किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में काम करेंगे। हमें शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के अवसरों में महिलाओं के लिए समानता सुनिश्चित करनी होगी, और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी भी प्रकार के शारीरिक, मानसिक या यौन उत्पीड़न से सुरक्षित रहें।

महिला सशक्तिकरण का मतलब केवल महिलाओं को अधिकार देना नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक सदस्य को समानता और न्याय के आधार पर अवसर प्रदान करना है। एक सशक्त महिला न केवल अपनी जिंदगी में सफलता प्राप्त करती है, बल्कि वह अपने परिवार और समाज को भी समृद्ध करती है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का यह अवसर हमें प्रेरित करता है कि हम न केवल महिलाओं के संघर्ष को समझें, बल्कि उनकी सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाएं। यह समय है कि हम एक ऐसा समाज बनाएं, जहां हर महिला को अपनी पूरी क्षमता का विकास करने का अवसर मिले, और उनका योगदान पूरी दुनिया में सम्मानित हो। कार्यक्रम में बेटियों के हक में ललितपुर हमारी आवाज, हमारी बेटियों के सम्मान भविष्य के लिए हाथ उठाकर शपथ ली गई। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक साथ “लंच विद लाडली” किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।