ललितपुर ।कांग्रेस द्वारा लखनऊ विधानसभा घेराव में हुई मौत की निष्पक्ष जांच की मांग।

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ललितपुर – कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर प्रदेश भर में प्रत्येक जिले के कार्यकर्ताओं द्वारा जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल महोदय को ज्ञापन दिए जा रहे हैं इस परिपेक्ष में आज ललितपुर जिले के अध्यक्ष राकेश रजक एडवोकेट के नेतृत्व में  कांग्रेस कमेटी द्वारा जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से महामहिम राज्यपाल महोदया को को ज्ञापन दिया गया जिसमें बताया गया कि ,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आह्वान पर प्रदेश भर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा जनहित के मुद्दों को लेकर लखनऊ विधानसभा घेराव 18 दिसम्बर को किया जा रहा था उसी दौरान  पुलिस द्वारा की गई सघन बेरिकेटिंग में पुलिस की धक्का मुक्की में दब कर गोरखपुर निवासी यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रभात पांडे की दुखद मृत्यु हो गई थी जिसकी प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच में हीलाहवाली की जा रही है  । कांग्रेसियों द्वारा कहा गया कि प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कर शहीद प्रभात पांडे के पीड़ित परिवार को 50 लख रुपए मुआवजा दिलाए जाने की मांग की गई है। और उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस दौरान जिला अध्यक्ष राकेश रजक एडवोकेट, नगर अध्यक्ष रफीक अली,महासचिव पुनीत देवलिया एडवोकेट, महासचिव पंकज हुंडैत,असलम खान, मोहन सिंह चंदेल,गौरव जैन एडवोकेट,नेहा तिवारी, राजमती जैन, बहादुर अहिरवार एडवोकेट, अजय प्रताप तोमर, कुलदीप पाठक, अदल सिंह वैश्य सौजना,अजय कुशवाहा एडवोकेट,आशीष दुबे, प्रेम भैया नामदेव,महेंद्र पनारी, महेश रजक, शिशुपाल नामदेव,रामस्वरूप रजक,सुनील अहिरवार, अर्जुन कुशवाहा एडवोकेट, आदि मौजूद रहे।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।