ललितपुर ।धूमधाम से मनाया गया बेटी’ का जन्मदिन

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ललितपुर। खुशकिस्मत हूं कि मेरी एक बेटी है, बेटी वह होती है जो दो कुलों की लाज रखती है: पिता ब्रजेन्द सपेरा*
सहेलियों, परिजनों एवं रिश्तेदारों ने दूरभाष एवं सोशल मीडिया पर दी जन्मदिन की बधाई
बेटी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर पिता ने कहा कि मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरी एक बेटी है, बेटी वह होती है जो दो कुलों की लाज रखती है। बेटी है, तो हम हैं। आस्था सपेरा का जन्म जनपद के ललितपुर में साधरण परिवार में 07  फ़रवरी 2022 को जन्मी आस्था सपेरा परी ‘ अपने पिता, दीदी, बड़े मम्मी-पापा, चाचा-चाची एवं अपने छोटे-बड़े भाई-बहिन की सबसे लाडली आस्था सपेरा (परी )है, प्रत्येक वर्ष

बेटी का जन्मदिन पूरा परिवार बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाता है। आज सुबह से बेटी के जन्मदिन की बधाई एवं शुभकामनाएं दूरभाष, एवं सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो ने ज्ञापित की।

आस्था की दादी कुसुम सपेरा ने नव वर्ष एवं आस्था का जन्मदिन को अनोखे तरीके से मनाया, उन्होंने अपनी नातिनि के जन्मदिन को खुशी को लोगों के साथ मिठाई बांटकर मनाया। आस्था के बड़े

भैया सत्यम सपेरा. सुभान्स देनबार का मानना है कि बेटी एक ही नहीं, दो कुलों की लाज रखती है। बेटी है तो हम हैं। बेटी है, तो समाज है। आस्था का जन्मदिन सहेलियों, परिजनों एवं रिश्तेदारों द्वारा धूमधाम से मनाना। भैया सत्यम सपेरा ने बताया कि वह इसलिए नहीं कर रहे कि उन्हें वाहवाही बटोरनी है, बल्कि उनका मकसद है- लोगों को यह एहसास दिलाना की बेटी है, तो कल है।
आस्था की बड़ी बहिन महक सपेरा ने बताया कि मेरा यह जश्न मनाने का तरीका तब सार्थक हो जाता है, जब लोग फोन कर कहते हैं कि बहिन में भी बहुत खुश किस्मत हूं कि मैं एक बेटी का पिता हूं। लोगों को समझना जरूरी है की बेटियां बोझ नहीं हैं, बल्कि बेटी को पढ़ा लिखा कर हर परिवार में बेटियां कंधे से कंधा मिलाकर घरवालों का बोझ उठाने के लिए तैयार है। वह माता-पिता के बुढ़ापे का सशक्त सहारा है।
*संवाददाता सुरेंद्र सपेरा*

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।