ललितपुर ।समावेशी व सतत भविष्य निर्माण को लेकर कार्यक्रम आयोजित

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ललितपुर। दिव्यांग दिवस के अवसर पर समावेशी एवं सतत भविष्य निर्माण के लिए एचबीएम हॉस्पिटल में एक्स-रे विल्टी इनिशिटिव प्रोजेक्ट के तहत विश्व दिव्यांग दिवस की अवसर परसतत भविष्य निर्माण एवं जनित क्षमता को बढ़ाने हेतु एक समारोह का आयोजन किया गया जिसमें सभी अतिथियों का प्रोजेक्ट ऑफिसर प्रदीप मसीह ने स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि की भूमिका निभा रहे शुभांशु सोनकर ने दिव्यांग दिवस की महत्व व उसकी उपयोगिता के बारे में प्रस्तुत प्रकाश डाला। इसी क्रम में अमित ब्लू फील्ड में उपस्थित सेवाओं के बारे में और उपलब्ध सेवाओं पर विस्तार से चर्चा की। विश्व स्वास्थ्य संगठन के डा.ई.जी. लारासन ने टीवी बीमारी संक्रमित मरीजों और रोकथाम पर जानकारी दी। साई ज्योति संस्था से अजय श्रीवास्तव ने इस कार्यक्रम में भाग लेते हुये कहा कि उनकी संस्था के द्वारा जो भी सहयोग होगा, वह हर समय करने को तत्पर रहेगी। इसी क्रम में गूंज संस्था के प्रबंधक सुशील कुमार यादव ने भी इसी बात को दोहराया। इस कार्यक्रम में उपस्थित दिव्यांगों की सोसाइटी और प्रगति भारत में एचआईवी एड्स की संस्था ने निशुल्क जांच की ओर 12 ग्रामों से आए दिव्यांगों को संस्था की ओर से प्रस्तुत किया गया।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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