वन विभाग ने 9 फीट लंबे अजगर का किया रेस्क्यू चाचौड़ा से संवाददाता चंद्र मोहन नामदेव

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चाचौड़ा बीनागंज वन विभाग की टीम ने 20 किलो एवं 9 फीट लंबे अजगर का किया रेस्क्यू
हम आपको बता दें की बीनागंज क्षेत्र के कोटरा बिट के ग्राम भानपुरा भेसुआ के पास शनिवार रात एक अजगर मिलने की जानकारी मिली हमें मिली जानकारी के अनुसार गांव के ही एक किसान संतोष प्रजापति ने अपने खेत पर काम कर रहे थे तभी उन्हें एक अजगर को देखा उसे देखकर मैं घबरा गए और इसकी सूचना उन्होंने गांव वालों को दी गांव वालों ने तत्काल वन विभाग बीनागंज  को सूचना दी सूचना मिलने पर रेंजर सौरभ द्विवेदी ने वन विभाग की बीट गॉड अमृतलाल सैनी उनके साथी राजेश भील ,गोविंद मीणा को मौका पर पहुंचा उन्होंने मौके पर पहुंचकर अजगर होने की सूचना रेंजर सौरभ द्विवेदी को दी जिस पर रेंजर सौरभ द्विवेदी के द्वारा राधौगढ़ से अपनी रेस्क्यू टीम को बुलाया 1 घंटे की मेहनत के बाद अजगर को रेस्क्यू किया गया रेस्क्यू टीम के सदस्य दिनेश सैनी ने बताया कि जैसे ही हमको इसकी सूचना मिली हम हमारी पूरी टीम के साथ और पूरी तैयारी के साथ यहां पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद हमने 20 किलो बजनी एवं 9 फीट लंबे अजगर को पकड़ा इसकी सूचना हमने रेंजर साहब सौरभ द्विवेदी को दी तथा उनके आदेश पर दूसरे दिन सुबह इसको जंगल में छोड़ा गया

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।