विवाह पंचमी / राम सिया विवाह / विशझुक जैयो तनक रघुवीर , लली हमरी छोटी है बनें दूल्हा छवि देखो भगवान की ,दुल्हन बनीं सिया जान

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ललितपुर । विवाह पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए नेहरू महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि राम विवाहोत्सव मानव मात्र के जीवन का आनंदोत्सव है । यह विवाह तात्विक दृष्टि से तो चिरंतन है ही , पर इतिहास की दृष्टि से त्रेता युग में संपन्न होता है ,  किंतु समसामयिक युग में ऐसा एक भी घर नहीं है जिसके प्रत्येक आंगन में राजा जनक का मंडप ना बना हो तथा प्रत्येक कन्या व वर – सीता व राम के रूप में सदा के लिए बंधन में न बँधे हों । उक्त प्रसंग में , लोकगीत चाहे बुंदेली , अवधी, बृज, छत्तीसगढ़ी , भोजपुरी , राजस्थानी , असमिया , कश्मीरी या दक्षिण भारत के ही क्यों न हों , प्रत्येक  नव युगल के घरों में बन्ना बन्नी बनकर , राम-सीता लौकिक रूप में पधारते हैं ।  इसलिए धनुष भंग के पश्चात देश भर की बालाऐं बुंदेली तर्ज पर राम से ठिठोली करते हुए , बेधड़क वरमाला के समय कह उठतीं हैं –
झुक जइयो तनक रघुवीर लली हमारी छोटी है –
तुलसीदास जी को बड़ा आनंद आता है कि भांवरी के समय , राम को सीता जी के जब पीछे पीछे चलना पड़ता है , उन्हें क्यों ना भाव विभोर होना पड़े ? क्योंकि तुलसीदास जी का मानना है कि ” मोरे मन प्रभु अस विश्वासा , रामतें  अधिक रामकरिदासा ” गठजोड़े  में बँधी गाँठ की ओर आगे चलती हुई विदेहनंदिनी , पीछे पीछे चल रहे राम से कदाचित संकेत कर रही हैं कि – जीव को कहीं विसार न दें , इसलिए याददाश्त की गांठ अच्छी तरह  से बांधे रखें । जनक मण्डप मानो जीव का हृदय बन गया है । तथा कन्यादान के समय ग्रंथिबंधन (गठबन्धन) होता है , जिसका आशय है-ईश्वर बंधा हुआ है , क्योंकि उसने भक्तों की अहंताऔर ममता को स्वीकार कर लिया है । सिंदूरदान विवाह का अति मनोरम कृत्य है । तुलसीदास जी कहते हैं – ‘ राम सीय सिर सेंदुर देहीं ‘ – अर्थात अखंड सौभाग्यवती भव कहकर स्वयं को चिरंजीवी रहने का वरदान , अपनी जीवन संगिनी से ले रहे हों । गोस्वामी जी ने इस प्रसंग के माध्यम से यह बताया है कि – निष्काम जनक श्री सीता जी का समर्पण करके धन्य हो गए तथा सकाम दशरथ जी तो  भगवान श्री राम और साक्षात भक्ति रूपा सीता जी को लेकर लौटते हैं तो जीवन में परिपूर्णता का अनुभव करते हैं । प्रत्येक  गृहस्थ के घर में , ऐसे ही विलक्षण विवाह के स्वर्णिम अवसर , आनंद की वृष्टि  करते रहें। इसी में इस प्रसंग की सार्थकता है ।
*अनुज सिंह ठाकुर ब्यूरो रिपोर्ट ललितपुर*

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।