विश्व की सात अजूबे में शामिल ताजमहल अब देख सकेंगे फ्री में

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आगरा/आज से तीन दिन तक ताज में नो टिकट
आमतौर पर ताजमहल को फ्री में देखने का मौका कम ही मिलता है। अगर मिल भी जाए तो मुख्य गुंबद और शहंशाह शाहजहां और मुमताज की असली कब्रें देखने को नहीं मिलती हैं। साल में तीन दिन ही ये मौका होता है जब मुख्य गुंबद और शाहजहां और मुमताज की कब्रे खुलती हैं।

आगरा घूमने जाने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है। बादशाह शाहजहां के 369 वें उर्स के मौके पर बिना टिकट एंट्री मिलेगी। आज से तीन दिनों के लिए ताज का दीदार मुफ्त में कर सकेंगे। इस बार छह से आठ फरवरी तक शाहजहां का उर्स मनाया जाएगा और तीन दिन पर्यटकों के लिए ताजमहल में एंट्री फ्री रहेगी।

एएसआइ ने निशुल्क किया स्मारक
शाहजहां के उर्स में मुख्य मकबरे के तहखाना में स्थित शाहजहां व मुमताज की कब्रें पर्यटकों के लिए खोली जाती हैं। अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. राजकुमार पटेल ने छह व सात फरवरी को दोपहर दो बजे से सूर्यास्त तक और आठ फरवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक स्मारक में पर्यटकों को निश्शुल्क प्रवेश दिया जाएगा।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।