सिरोंज (नईम गौरी) बाबा विश्वनाथ की नगरी देवपुर धाम में कांग्रेस के सागर लोकसभा प्रत्याशी गुड्डू राजा बुंदेला ने दर्शन किए ।

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लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं वैसे-वैसे कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवार भी अधिक सक्रियता के साथ अपने चुनावी प्रचार में दिखाई देने लगे हैं इन दावेदारों को भगवान का सहारा है और भगवान के सहारे के लिए दोनों पार्टियों की दावेदार अपने-अपने स्तर पर पूजा पाठ एवं माथा टेकने  में जुटे हुए हैं।

इसी तर्ज पर बीते दिनों सागर लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रभूषण से बुंदेला गुड्डू राजा भी सुप्रसिद्ध क्षेत्र देवपुर पहुंचे।बाबा विश्वनाथ की नगरी देवपुर धाम में कांग्रेस के सागर लोकसभा प्रत्याशी गुड्डू राजा बुंदेला ने दर्शन किए एवं कार्यकर्ताओं से मुलाकात की उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की बात कही इस दौरान उनके साथ पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर जिला अध्यक्ष मोहित रघुवंशी गगनेंद्र रघुवंशी पूर्व ब्लाक अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह राजपूत ग्राम पंचायत देवपुर से सरपंच प्रतिनिधि अर्जुन राजपूत एवं अनेक कार्यकर्ता शामिल हुए।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।