स्वच्छता ही सेवा 2024 अभियान के अंतर्गत चलाया सफाई अभियान

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शाजापुर (टीएमई न्यूज)। स्वच्छता ही सेवा 2024 अभियान के अंतर्गत जनपद पंचायत मोहन बड़ोदिया की ग्राम पंचायत मोहन बड़ोदिया में वृहद स्तर पर स्वच्छता पखवाड़ा के तहत सफाई अभियान चलाया गया इस दौरान समस्त कर्मचारियों और अधिकारियों ने स्वच्छता श्रमदान किया गया। इस दौरान मोहन बड़ोदिया जनपद पंचायत सीईओ अमृतराज सिसोदिया, स्वच्छ भारत मिशन प्रभारी आरती पडोले, ग्राम पंचायत सचिव अर्जुन सिंह चौहान, सरपंच प्रतिनिधि नारायण पाटीदार, जनपद सदस्य गोपाल राठौर, पिछड़ा मोर्चा मंडल अध्यक्ष मनीष प्रजापति, संदीप पाटीदार और जनपद और ग्राम पंचायत के कर्मचारी सहित आदि लोग उपस्थित रहे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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