तेंदूखेड़ा।जिला दिगम्बर जैन महासभा नरसिंहपुर की कार्यकारिणी की बैठक संपन्न

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तेंदूखेड़ा । धर्म नगरी तेंदूखेड़ा में आज स्थानीय दिगम्बर पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर प्रांगण में सम्पन्न हुई जिसमें जिले की सभी तहसीलों से महासभा के कार्यकारिणी पदाधिकारी और सदस्यों ने भाग लिया । इसमें महासभा के कई एजेंडों पर चर्चा हुई तो वहीं महासभा के रजिस्ट्रेशन की योजना बनाई गई । जिले की पांचों तहसील से दिगम्बर जैन समाज से बनी कार्यकारिणी के सदस्य इस कार्यक्रम में पहुंचे जहां कई मुद्दों पर चर्चाएं की गईं और सुझाव देकर निर्णय लिए गए । जिसमें जिले के सभी सामाजिक परिवारों की गणना करने का निर्णय लिया गया तो वहीं जिले के बाहर पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर माहौल देने की बात भी रखी गई… जिले में सभी समुदाय के बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले प्रतिभावान बालक बालिकाओं को पुरस्कृत करने का भी प्रस्ताव रखा गया तो वहीं सर्वधर्म समभाव के चलते कई कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा भी तय की गई । इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के चित्र के समक्ष महासभा के सभी कार्यकारिणी पदाधिकारी और संरक्षकों ने दीप प्रज्वलन कर किया । कार्यक्रम का संचालन करते हुए महीष मोदी ने कार्यक्रम की भूमिका को बताया और महासभा की बैठक के एजेंडों को रखा जिसके बाद महासभा के महामंत्री अजय जैन ने बैठक को संबोधन करते हुए महासभा के रजिस्ट्रेशन की कार्यवाही पूरी करने की विस्तृत जानकारी देते हुए जल्द रजिस्ट्रेशन पूर्ण कराने की बात कही…. वहीं उन्होंने इसके संविधान को भी बताते हुए जिले के दस सदस्यों का चयन कर रजिस्ट्रेशन करने की कार्यवाही को आगे बढ़ाने की बात कही… इस दौरान जिले से आए कार्यकारिणी के सदस्यों और पदाधिकारियों ने कई तरह के प्रस्ताव रखे जिस पर सभी ने अपने विचार प्रस्तुत किए… महासभा के संरक्षकों प्रदीप जैन,सुभाष जैन व डाक्टर प्रकाश जैन ने भी अपने अपने विचार देते हुए कहा कि सबसे बड़ी सेवा मानव सेवा है जिसके लिए हमें सदा तत्पर रहना चाहिए इस दिशा में हमेशा सजगता से काम करने की जरूरत है हर जगह ऐसे जरूरत मंद कई लोग है जिन्हें थोड़ा सा साथ मिल जाए तो वे तरक्की कर सकते हैं ऐसे में उनकी मदद के लिए हमारी समाज को काम करने की जरूरत है । कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन को संबोधित करते हुए गोटेगांव से आए महासभा के अध्यक्ष राजकुमार जैन ने सभी सदस्यों का अभिवादन करते हुए सभी सदस्यों के प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की उन्होंने कहा कि देव शास्त्र गुरु की सेवा में हम सबको सदैव अग्रणी रहते हुए हमें अपने इंसानियत के फर्ज भी पूरा करने की जरूरत हैं । मानव समाज के लिए हम सबको अपना अपना योगदान देना चाहिए । जिले में सभी कमेटियां अपना अपना बेहतर कार्य करें और उनके लिए हम सब समन्वय करके उनकी व्यवस्थाओं में जहां जरूरत हो सब मिलकर मदद करें… समाज और उसके बाहर ऐसे लोगों को चिन्हित करें जो नौकरी के लिए जरूरतमंद हों या आर्थिक स्थिति को लेकर उन्हें मदद करने की दिशा में काम किया जाए । इस अवसर पर नरसिंहपुर, गोटेगांव, करेली, गाडरवारा, तेन्दूखेड़ा, बरमान, सिहोरा , आमगांव आदि स्थानों से महासभा के सदस्य उपस्थित रहे।संवाददाता – अमित खरे तेंदूखेड़ा

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।