देवास । महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण देकर बनाया स्वावलंबी- 13 महिलाओं को ऋण दिलाकर उद्योग स्थापित कराया गया

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देवास। संस्था दशमेश सोशल एण्ड एज्युकेशनल सोसायटी द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक ओर कदम बढ़ाते हुए उन्हें उद्योग स्थापित करवाकर स्वावलंबी बनाने का कार्य किया है। भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) द्वारा वित्तपोषित एवं संस्था दशमेश द्वारा क्रियान्वित महिलाओं के लिए ग्रामीण उद्यम विकास कार्यक्रम में गाय के गोबर से निर्मित उत्पादो का प्रशिक्षण दिया गया था। इसमें 30 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया। उसके पश्चात उनमें से 75 प्रतिशत अर्थात 23 महिलाओं को स्वावलंबी बनाया गया। जिसमें 10 महिलाओं को दशमेश स्व सहायता समूह नाम से नगर निगम के माध्यम से पंजीयन कराया और बैंक आफ बड़ौदा द्वारा वित्तपोषित कर गाय के गोबर के उत्पादो का निर्माण करवाया जा रहा है। बची हुईं 13 महिलाओं को शासन की विभिन्न उद्यम विकास योजनाओं के माध्यम से उन्हें बैंक द्वारा ऋण दिलाकर उनके स्वयं के उद्योग स्थापित कराए गए जिनमें वह गाय के गोबर से निर्मित विभिन्न उत्पाद जैसे गणेश जी, तोरण, दिये, गमले, राखियां, घड़ी, जाप माला, अगरबत्ती, धूप बत्ती, धूप कोण, संब्रानी कप बनाए जा रहे हैं। संस्था के संमित खनूजा ने बताया कि सिडबी के अधिकारी पुष्पेंद्र तिवारी द्वारा इन उद्यमों का निरीक्षण किया गया और उनके दस्तावेज का सत्यापन कर महिला उद्यमियों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर दीपक विश्वकर्मा, आरती जोशी एवं यशराज पाठक का विशेष सहयोग रहा।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।