बीना।विधायक निर्मला सप्रे के प्रयासों से बीना को मिली 150 करोड़ की सड़कों और पुलों की ऐतिहासिक सौगात

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बीना: विकास की नई गाथा लिखते हुए बीना विधानसभा क्षेत्र को विधायक निर्मला सप्रे के अथक प्रयासों और मुख्यमंत्री मोहन यादव के सहयोग से लगभग 150 करोड़ रुपये की सड़कों और पुलों का तोहफा मिला है। हाल ही में पेश किए गए मध्य प्रदेश के अनुपूरक बजट में लोक निर्माण विभाग के तहत बीना क्षेत्र के लिए 22 बड़ी परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इन परियोजनाओं के तहत सड़क और पुल निर्माण का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।

निर्मला सप्रे: विकास की धुरी बनीं विधायक
विधायक निर्मला सप्रे ने बीना क्षेत्र के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उनकी निरंतर सक्रियता और जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के चलते बीना को एक के बाद एक बड़ी सौगातें मिल रही हैं। इन विकास कार्यों से क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा और ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

150 करोड़ की परियोजनाएं: हर गांव, हर सड़क को जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधायक सप्रे की मांगों को ध्यान में रखते हुए बीना क्षेत्र के लिए निम्नलिखित सड़क और पुल परियोजनाओं की मंजूरी दी है:

1. बीना से देवल पहुंच मार्ग (18 कि.मी.)
लागत: ₹24.3 करोड़
यह मार्ग हडकल जैन, उमरिया, दुधावनी और पालीखेड़ा को जोड़ेगा।
2. भानगढ़ से गिरोल मार्ग (18.5 कि.मी.)
लागत: ₹24.97 करोड़
ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य बाजारों से जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगा।
3. गढ़ा पडरिया से बीना-कुरवाई पहुंच मार्ग पर पुल निर्माण
लागत: ₹6.5 करोड़
4. मंडी बामोरा-विदिशा मार्ग पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण
लागत: ₹5.4 करोड़
यातायात को सुगम बनाने के लिए यह एक बड़ी परियोजना है।
5. गणेशा नदी पर पुल (नौगांव प्रधानमंत्री सड़क योजना)
लागत: ₹4.5 करोड़
6. खिमलासा-महेरा मार्ग (2 कि.मी.)
लागत: ₹2.7 करोड़
7. निर्तला-मंडी बामोरा से भापसोन-पहलेजपुर मार्ग (6.25 कि.मी.)
लागत: ₹8.43 करोड़
8. बेरखेड़ी टाड़ा से रिफायनरी गेट नंबर 1 मार्ग (1.2 कि.मी.)
लागत: ₹1.35 करोड़
9. बेलई-देहरी मार्ग (4.5 कि.मी.)
लागत: ₹6.07 करोड़
10. बसाहरी-बरछा तिराहा मार्ग (4 कि.मी.)
लागत: ₹5.4 करोड़
11. बेधई-रुसल्ला मार्ग (3.25 कि.मी.)
लागत: ₹4.38 करोड़
12. रुसल्ला-गिरोल मार्ग (3.5 कि.मी.)
लागत: ₹4.72 करोड़
13. बसाहरी ढांड से निवारी मार्ग (2.5 कि.मी.)
लागत: ₹3.37 करोड़
14. भानगढ़ से खिरिया भगवती-आमखेड़ा मार्ग (4 कि.मी.)
लागत: ₹5.4 करोड़
15. देवल से पालीखेड़ा मार्ग (4 कि.मी.)
लागत: ₹5.4 करोड़
16. हरदौट निबौदिया से ऐरण मार्ग (3 कि.मी.)
लागत: ₹4.5 करोड़
17. पिपरासर महादेव घाट मार्ग (2 कि.मी.)
लागत: ₹2.7 करोड़
18. नौगांव-सतौरिया मार्ग से बरौदिया घाट मार्ग (3 कि.मी.)
लागत: ₹4.05 करोड़
19. बीना-कंजिया से लहटवास-बिलखना मार्ग (7 कि.मी.)
लागत: ₹9.45 करोड़
20. निर्तला मंडी बामोरा मार्ग से भापसोन-पहलेजपुर मार्ग (6.25 कि.मी.)
लागत: ₹8.43 करोड़

विकास कार्यों से बढ़ेगी क्षेत्र की समृद्धि
इन परियोजनाओं के पूरा होने से बीना क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। ग्रामीण इलाकों से शहरी क्षेत्रों तक की दूरी कम होगी और क्षेत्र का समग्र विकास संभव होगा।

मुख्यमंत्री का विशेष रुझान और विधायक का समर्पण
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 9 सितम्बर को बीना में मंच के माध्यम से  26 बड़े विकास कार्यों की घोषणा की थी, जिनमें 151 गांवों को बीना नदी परियोजना से जोड़ना, खिमलासा को पूर्ण तहसील का दर्जा, मंडी बामोरा को नगर परिषद और 100 बिस्तरीय अस्पताल का निर्माण शामिल है। विभागों में इन पर तेज़ी से कार्य चल रहा है। जल्द ही यह सभी घोषणाये जमीन पर आ जाएगी।

विधायक निर्मला सप्रे का बयान
“यह सब क्षेत्र की जनता की आशाओं और मुख्यमंत्री के सहयोग से संभव हुआ है। मेरा सपना है कि बीना न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में विकास का उदाहरण बने।”

जनता की प्रतिक्रिया
क्षेत्रवासियों ने विधायक सप्रे और मुख्यमंत्री यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से बीना क्षेत्र का स्वरूप बदल जाएगा। लंबे समय से रुकी हुई विकास की धारा अब तेजी से प्रवाहित हो रही है।

निष्कर्ष
विधायक निर्मला सप्रे के प्रयासों ने बीना क्षेत्र को विकास के पथ पर अग्रसर कर दिया है। इन 150 करोड़ की परियोजनाओं से बीना न केवल एक आधुनिक और उन्नत क्षेत्र के रूप में उभरेगा, बल्कि यह क्षेत्रवासियों के जीवन को भी बेहतर बनाएगा।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।