ललितपुर।फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी धन के बन्दरबांट का आरोप
पार्षद ने जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी को सौंपा शिकायती पत्र

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ललितपुर। नगर पालिका परिषद में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। विगत दिवस वार्ड पार्षद मनमोहन चौबे एड. ने जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी को एक शिकायती पत्र सौंपते हुये नपाध्यक्ष सरला जैन के हस्ताक्षरों की जांच कराये जाने की मांग उठाते हुये परिजनों पर फर्जी हस्ताक्षर से सरकारी धन के गबन और विकास कार्यों में शिथिलता बरते जाने का गम्भीर आरोप लगाया है। पार्षद मनमोहन चौबे एड. ने डीएम के समक्ष दावा करते हुये अवगत कराया कि नपाध्यक्ष कार्यालय आने-जाने में असमर्थ हैं। आरोप लगाया कि नपाध्यक्ष के परिजनों द्वारा उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर चैकों के जरिए सरकारी धन का बन्दरबांट किया जा रहा है। बताया कि इस सम्बन्ध में उनके द्वारा विगत 4 नवम्बर, 12- 13 व 20 नवम्बर को शिकायती पत्र दिया गया, लेकिन उनके शिकायती पत्र पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। पार्षद ने डीएम से मामले की गम्भीरता को समझते हुये मामले की गहन जांच करायी जाकर कार्यवाही किये जाने की मांग पुरजोर तरीके से उठायी है। अन्यथा की स्थिति में उन्होंने आगामी 23 दिसम्बर की सुबह 11 बजे से नगर पालिका परिषद के बाहर ही धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।