विधायक सप्रे ने राज्यपाल अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्तुत

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बीना: विधानसभा का बजट सत्र 2024 आज प्रारंभ हुआ, राज्यपाल द्वारा दिए गए का अभिभाषण पर विधायक निर्मला सप्रे द्वारा लगभग 100 कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्तुत किए गए, जिसमे किसानों का गेंहू समर्थन मूल्य 2275 के स्थान पर 2700 करने,बीना को जिला बनाने, बीना में विश्वविद्यालय की स्थापना करने, एक्सीलेंस कॉलेज खोलने, रिंग रोड निर्माण कराने, स्टेडियम निर्माण करने, सैनिक स्कूल खोलने, ऐतिहासिक धरोहर ऐरन को पर्यटन का दर्जा, सिविल अस्पताल में डॉक्टर के पदों की पूर्ति करने, नगर पालिका क्षेत्र में नवीन पार्क का निर्माण, करने, नगर पालिका क्षेत्र में गौशाला निर्माण करने,मंडीबमोरा खिमलासा भानगढ़ को तहसील का दर्जा दिए जाने, बीना में मेडिकल कॉलेज खोलने, कर्मचारी की पुरानी पेंशन बहाल करने, लिपिक वेतन एवं दूसरा तीसरा समयमान वेतन विसंगति,
रिफाइनरी व अन्य कंपनियों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी देने, कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देने, अतिथि शिक्षकों का नियमितीकरण करने, अतिथि शिक्षकों व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिका को प्रतिमाह वेतन भुगतान करने, किसानों को 15 घंटा बिजली देने,किसानों के लिए बुआई के पूर्व खाद व बीज का भंडारण करने, बस स्टैंड पर यात्री यात्री प्रतीक्षालय निर्माण, सुलभ शौचालय का निर्माण कराने, जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने पर मुआवजा देने,
रेल्वे कोर्ट स्थापित करने,मंडीबामोरा व भानगढ़ में कॉलेज खोलने, कन्या महाविद्यालय में विज्ञान संकाय शुरू करने, मांस व मछली बिक्रेताओ के लिए मार्केट बनाने, 40पंचायतों में खेल प्रेमियों के लिए खेल मैदान बनाने,मलिया गांव में सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी खोलने, बेलई मुख्य मार्ग से मलिया गांव तक की सड़क का मजबूतीकरण करने, बेलाई से देहरी मार्ग,निवोदा से एमडीआर तक मार्ग, ऐरन तिराहा से निवोदिया मार्ग, भंखराई से आगासोद मार्ग, देवल से पालीखेड़ा मार्ग, बलारखेड़ी से प्रधानमंत्री मार्ग, एमडीआर से सलोता मार्ग, देवाराजी से उमरिया मार्ग, बसाहरी से भरछा मार्ग, चमारी से पघव मार्ग, गोदना पडरिया रोड व पुल निर्माण, ओरैया से खुरई मार्ग, मंडी बसाहरी दरवाजा से माला सुनेती मार्ग, दुनातर से बहरौल केवट बंगला के पीछे हुए शासकीय भूमि तक मार्ग,दारैया तिराहा से मडनी मार्ग, रामपुर से दुद्दरू तक मार्ग, पिपरासर से मादेव घाट, बम्होरी से जगराई मार्ग, दुधई दरवाजा वार्ड 2 पीर बाबा से भैरो की गली मार्ग, हड़कल जैन से देवराजी तक मार्ग, लहटवास से भरछा मार्ग, सनाई से बनोट मार्ग, मुड़री में हनुमान मंदिर से खोजाखेड़ी आदि निर्माण कराने, नव नियुक्त कर्मचारियों को 100% वेतन देने ब परिविक्षा अवधि 2 वर्ष करने, 30 जून और 31 दिसंबर को सेवानिवृत कर्मचारियों को वेतन वृद्धि देने, स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर अनुकंपा नियुक्ति हेतु पात्रता परीक्षा और बीएड डीएड का बंधन समाप्त करने, क्षेत्र की कच्ची मार्गो को प्रधानमंत्री सड़क और मुख्यमंत्री सड़क से जोड़ने आदि विषयो पर कटौती प्रस्ताव दिए, विधायक निर्मला सप्रे क्षेत्र की जानता की मूलभूत समस्यायों के निराकरण कराने कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।