शॉपिंग मॉल्स, सरकारी व गैर संस्थानों में फायर सेफ्टी ऑडिट भी आवश्यक अग्निशमन मॉकड्रिल की वीडियोग्राफी भी हो सार्वजनिक
फायर सेफ्टी ऑडिट की जानकारी नोटिस बोर्ड पर चस्पा होने से बढ़ेगी जागरूकता

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ललितपुर। झांसी मेडीकल कॉलेज के एन.आई.सी.यू. (निक्कू) वार्ड में आग लगने से दस नवजात काल के गाल में समा गये थे, अब यह संख्या बढ़कर करीब 15 तक जा पहुंची है। घटना के बाद ललितपुर के अस्पतालों में घटना के अगले दिन ही फायर सेफ्टी डिवाइसों की जांच कर अग्निशमन सिलेण्डरों को बदलने का कार्य किया गया था। साथ ही कई प्राईवेट अस्पतालों में भी सम्यक परिवर्तन देखने को मिले। लेकिन शहर में कई शॉपिंग मॉल्स, सरकारी व गैर सरकारी विद्यालय, अस्पताल और ऐसे प्रतिष्ठान और संस्थान हैं, जिनमें प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे प्रतिष्ठान, संस्थान पर फायर सेफ्टी ऑडिट के साथ करायी जाने वाली मॉकड्रिल की वीडियोग्राफी मानकों सहित सार्वजनिक किये जाने से जागरूकता में इजाफा हो सकता है। फायर सेफ्टी ऑडिट के बाद मॉकड्रिल के नाम पर दर्जनों लोगों के बीच सिलेण्डर को रखकर फोटोग्राफी कराना मात्र ही इस संदेश का वाहक नहीं माना जा सकता कि किन्हीं कारणों से आग लगने की घटना के बाद ऐसे स्थानों पर लोग सुरक्षित हैं या होंगे या हो सकते हैं। आमजन को फायर सेफ्टी के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर जानकारी दी जाये और आग लगने से किस प्रकार और कौन से सुरक्षा उपायों व उपकरणों से जनहानि को टाला या बचाया जा सकता है, इस पर भी विशेष फोकस किये जाने की आवश्यकता है। ऐसी वस्तुएं जो कि आमतौर पर लोगों के पास आसानी से मिल सकती हैं और ऐसी वस्तुओं को कैसे आग लगने पर इस्तेमाल किया जाये और आग लगने की घटनाओं को भी रोका जा सके, यह भी आमजन के बीच संदेश होना चाहिए।
मोहल्लों व गलियों में कैसे पहुंच सकता है अग्निशमन दल
ललितपुर शहर में कई मोहल्ले ऐसे भी हैं, जहां अग्निशमन दल के बड़े वाहन या चार पहिया वाहन नहीं पहुंच सकते हैं। ऐसे इलाकों में आग लगने की घटनाएं घटित हो जाती हैं तो ऐसे में वहां रहने वाले लोगों को क्या करना होगा, करना चाहिए। इसके लिए भी लोगों को जागरूक करने की महती आवश्यकता है। ऐसे स्थानों पर लोगों को यह भी समझाना होगा कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी घटना से आहत होता है तो उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाने से पहले किन सावधानियों को करना चाहिए और कैसे लोगों के जीवन रक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए।
अग्निशमन अधिकारियों के नाम व नम्बर किये जायें सार्वजनिक
आमजन को जिस प्रकार से झगड़ा फसाद होने या फिर विवाद की बढ़ती स्थिति को देखकर डायल 112 मन मस्तिष्क में रहता है। इसी प्रकार आग की घटनाओं को रोकने के लिए अग्निशमन दल के अधिकारियों के नाम, नम्बर और क्षेत्र की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी आवश्यक है। क्योंकि लोगों को जिले के अग्निशमन अधिकारी व कर्मचारियों की जानकारी भी नहीं होती है।
निर्धारित समय पर वीडियोग्राफी सहित हो फायर सेफ्टी ऑडिट व मॉकड्रिल
सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में शासन के निर्देशानुसार निर्धारित समय पर फायर सेफ्टी को लेकर ऑडिट और मॉकड्रिल किये जाने के साथ ही वीडियोग्राफी किये जाने की आवश्यकता है और यह सभी जानकारियां सार्वजनिक तौर पर प्रतिष्ठानों व संस्थानों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा हो, ताकि यहां आने वाले लोगों को भी जानकारी मुहैया रहे। फायर सेफ्टी ऑडिट व मॉकड्रिल की वीडियोग्राफी आग लगने जैसी घटनाओं के बाद साक्ष्य के तौर पर बड़ी मददगार साबित हो सकेंगी।
अनुज सिंह ठाकुर ब्यूरो रिपोर्ट ललितपुर

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।