क्या जल्द बिखर जाएगा INDI अलायंस? बंगाल में अकेले चुनाव लड़ना चाहती हैं ममता बनर्जी

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INDI अलायंस में तनाव।- India TV Hindi

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INDI अलायंस में तनाव।

ॉएक ओर लोकसभा चुनाव 2024 का समय धीरे-धीरे पास आ रहा है तो वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दलों के INDI अलायंस में तनाव साफ तौर पर सामने आने लगा है। एक ओर उद्धव ठाकरे की शिवसेना महाराष्ट्र में 23 लोकसभा सीटों पर दावा ठोक रही है तो वहीं, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भी पश्चिम बंगाल में अकेले ही चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। ऐसे में कांग्रेस के ऊपर विभिन्न दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर दवाब बढ़ रहा है। 

बंगाल को अकेले ही परखने की इच्छा

ममता बनर्जी ने गुरुवार को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में बंगाल को अकेले ही परखने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा है कि बंगाल में टीएमसी लड़ेगी और बीजेपी को हराएगी। बंगाल में केवल टीएमसी ही बीजेपी को सबक सिखा सकती है, कोई अन्य पार्टी नहीं। हालांकि, ममता ने कहा कि इंडिया गठबंधन देश भर में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगा।

23 सीटों पर अड़ी उद्धव की शिवसेना

लोकसभा की सीटों के बंटवारे पर विपक्षी गठबंधन के दलों के बीच खींचतान शुरू हो चुकी है। उद्धव की शिवसेना महाराष्ट्र की 23 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने पर अड़ी है। संजय राउत ने कहा है कि शिवसेना मतलब महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी। उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं से हमारी बातचीत चल रही है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से बात हो रही है। 

कांग्रेस का उद्धव गुट को जवाब

उद्धव गुट की ओर से किए गए सीटों पर दावे पर कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने तीखा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर हम 48 में से आपको (यूबीटी शिवसेना) 23 सीटें देंगे तो हम कहां से लड़ेंगे। असली सच्चाई यह है कि पिछले एक साल में, शिवसेना टूट गई और कई प्रमुख नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। यही स्थिति एनसीपी की भी है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।