चार साल से बंद घर में मिले 5 नर कंकाल, हैरत में आई पुलिस, जानें पूरा मामला

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सांकेतिक फोटो। - India TV Hindi

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सांकेतिक फोटो।

कर्नाटक के चित्रदुर्गा से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां एक घर से 5 नर कंकाल मिले हैं। पुलिस को शक है कि ये सभी एक ही परिवार के सदस्यों के हो सकते हैं। अब तक मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चित्रदुर्गा में स्थित ये घर एक  रिटायर्ड सरकारी अधिकारी का है और पिछले 4 सालों से बंद पड़ा हुआ था। पुलिस ने सभी नर कंकालों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। 

2019 में देखा गया था परिवार

पुलिस ने जब आस-पास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि ये घर एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी जगननाथ रेड्डी का है। 85 साल के जगननाथ रेड्डी इस घर में अपनी पत्नी और 2 बेटे और एक बेटी के साथ रहते थे, पत्नी प्रेमा की उम्र 80 साल थी, बेटी त्रिवेणी 62, बेटा कृष्णा 60 साल और उनका एक और बेटा नरेंद्र 57 साल का था। मोहल्ले वालों के मुताबिक इन सभी को आखरी बार जुलाई 2019 में देखा गया था, लोगों का कहना है कि परिवार के लोग किसी बीमारी से भी जूझ रहे थे। ये परिवार हमेशा अकेले ही रहता था किसी से मिलता जुलता नहीं था किसी के साथ बातचीत भी नहीं थी।

ऐसे मिले नर कंकाल

जांच में ये बात भी सामने आई है कि 2 महीने पहले इस घर का मैन डोर टूटा हुआ था। लोगों ने इसे नोटिस भी किया लेकिन पुलिस को इस बात की सूचना नहीं दी गई। 2 दिन पहले जब एक व्यक्ति ने जब दरवाजे से अंदर झांककर देखा तो उसे एक नर कंकाल दिखाई दिया, इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई जब पुलिस घर के अंदर दाखिल हुई तो एक कमरे से 4 नर कंकाल बरामद हुए 2 बिस्तर पर थे और 2 नीचे फर्श पर थे इसके अलावा दूसरे कमरे से एक और नर कंकाल बरामद हुआ। FSL और क्लू टीम को बुलाकर घटना स्थल की जांच की गई है, पुलिस ने घर को सील कर लिया है। 

गृह मंत्री जी परमेश्वर ने दिया बयान

इस हैरान कर देने वाली घटना पर कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने भी बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि मैंने घटना पर एसपी, आईजी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से बात की है। एक घर में पांच कंकाल मिलने की रिपोर्ट है। ऐसा कहा जा रहा है कि उनका एक रिश्तेदार एक एग्जिक्यूटिव इंजीनियर था और यह उनका घर है। वे कितने समय से वहां हैं, और वे कौन हैं? मैंने इसकी जांच करने को कहा है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।