झांसी गेट अंडर ब्रिज हुआ बंद अब मुर्दों को भी जाना पड़ेगा श्मशान घाट तक घूम कर

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बीना सागर जिले के बीना शहर में विकास के नाम पर जो हो रहा है वह कहीं ना कहीं गलत भी प्रतीत हो रहा है, दरअसल में बीना के सबसे पुराने अंडर ब्रिज जिसे झांसी गेट अंडर ब्रिज के नाम से माना जाता है वह अंडर ब्रिज अब रेलवे ने बंद करने की पूरी तैयारी कर ली है।

हालांकि इसका लगातार विरोध भी हुआ और संबंधित वार्ड के पार्षद बी डी रजक ने ज्ञापन देकर और अधिकारियों से बात करके भी इस ब्रिज को बंद ना करने की बात कही ।

इस ब्रिज के माध्यम से जहां लगभग 6 वार्डों के लोग बड़ी आसानी से रेलवे क्रॉसिंग पार करके शहर में आवागमन कर सकते थे वही मृतको के लिए भी इस ब्रिज के माध्यम से झांसी गेट शमशान घाट तक ले जाने में सुविधा रहती थी, अब मुर्दों को भी शमशान घाट तक ले जाने के लिए लगभग आधा किलोमीटर लंबा ओवर ब्रिज पर करना पड़ेगा और इसके बाद पुनः आधा किलोमीटर तक लौटकर शमशान घाट तक ले जाना पड़ेगा जनता की यह परेशानी कब हल होगी अभी यह कहना मुश्किल है फिलहाल इस अंडर ब्रिज को बंद करने का काम शुरू कर दिया गया है।

झांसी गेट अंडर ब्रिज बंद करने की तैयारी मशीनों के माध्यम से होने लगी खुदाई

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।